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तो उस रात भी हर बार की तरह मेरे दिल ने मुझसे कहा की मुझे उससे बात कर लेनी चाहिए फिर क्या था मैंने अपना सेल उठाया और उसको कॉल मिला दिया हमेशा की तरह ही उसने फिर कहा प्रिंस तुझे क्या होता है कि जब भी मुझे जरुरत होती है, जब भी मैं परेशान…

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तो उन रास्तों से आना जाना मेरा रोज़ का हिस्सा था हमेशा की तरह में अपनी धुन में मस्त गाते गाते सोचता सोचता निकल ही रहा था कि उन जानी पहचानी दो आँखों ने मुझे अपनी अोर खींचा उसने अपना चेहरा ढके हुए था मेने गाड़ी रोकी और उसकी तरफ बढ़ा पर दो पल के…

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कई बार बचपन की हरकतों को याद करते ही चेहरे पर एक हँसी आ जाती है। जब भी बचपन की यादें ताज़ा होती है तब चेहरे पर एक नया भाव होता है, इस भाव में लीन होते ही कई बार ख़ुशी के आँसू निकल जाते है तो कई बार एक विस्मयकारी हँसी आ जाती है।…

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रवि सुबह से बड़ा बेचैन था, आज बारह बजे बाहरवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने वाला था। परिणाम का तो सभी छात्रो को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। रवि को भी अपनी परीक्षा का बेसब्री से इंतज़ार था, उसका यह इंतज़ार कुछ घण्टे में खत्म होने वाला था। सुबह से उसे एक-एक पल…

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जानता हूं मैं कि जानती है वो मुझसे बेहतर कैसी मोहब्बत चाहिये मुझे आखिरकर यूं खुल के कभी कहा नहीँ उससे पर आज उसकी नज़रों ने कुछ ऐसी क़यामत बरपायी कि पूरे कपड़ों में आज मुझे वो ‘दैहिक-आनंद’ की साक्षात प्रतिमा नजर आयीं अपनी निगाहों की बेसब्र उंगलियों से उसकी हर वक्रता को टटोलता उस,…

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तो गाडी अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ रही थी, हम सब मंजिल से थोड़ा ही दूर थे क़ि रास्ते में एक चौराहा पड़ा| हमेशा की तरह ही वहा छोटे छोटे बच्चे अपनी जीविका चलाने के लिए कुछ न कुछ बेचने मे व्यस्त थे, गाड़ी चलने ही वाली थी कि मेरा ध्यान अपनी 4 वर्ष की…

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ज़िंदगी भी अजीबोगरीब है, न जाने कब कहा और क्यों?? बहुत कुछ नया सिखाती है राहों पे चलते चलते दोड़तें दोड़तें हर एक मोड़ पर नया आयाम दे जाती है जो आज सच लगता है कल शायद झूठ दिखे अथवा विपरीत आज जो विचार किसी विषय को लेके है वो जरुरी नहीं कल भी वेसे…

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  सुबह-शाम पार्क में खुले वातावरण में घूमने-फिरने से मन तरोताज़ा हो जाता है और सेहत के लिए भी अच्छा होता है। इसीलिए लोग सुबह-शाम पार्क में टहल लिया करते है। रवि भी कुछ दिनों से शाम को पार्क में टहलने आ रहा था। कुछ देर खुली हवा में बैठकर और थोड़ी देर टहल के…

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हर्ष आज अपने दोस्तों के साथ बाजार घूमने चला गया। उसे घूमने-फिरने का बहुत शौक था, उसके लिए तो वह कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेता था। उसकी उम्र तकरीबन ग्यारह वर्ष की होगी। बचपन से उसे अलग-अलग जगहों पर घूमने-फिरने की हमेशा उत्सुकता रहा करती थी। घर में उसे बाहर अकेले घूमने-फिरने की…

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मनोज अपने पाँव पटकते हुए घर से निकल गया, मन ही मन पता नही क्या-क्या बड़बड़ा रहा था, चेहरे पर गुस्सा झलक रहा था, आँखे लाल हो गई थी, आँखों में पानी था और सीधे तालाब के पास खाली जगह पर पहुँच गया। आज दूसरो के पेड़ से आम तोड़ते हुए उसके बड़े भैया ने…