तुम नहीं समझोगे

तुम नहीं समझ सकते

तुम कैसे समझ सकते हो जब आजतक अपनी पूरी ज़िंदगी में तुमने असफलता नहीं देखी

तुम हमेशा ही अच्छे अंको से पास/उत्तीर्ण हुए हो

तुम क्या जानो असफलता का दर्द

किसी के मुख से निकले ये शब्द उसके मन को अंदर ही अंदर कचोट रहे थे

जैसे किसी ने दिल पे वॉर किया हो

दिल पर बातों से लगे अघातो ने अश्रुअाे को आँखों से चेहरे पर लाने में समय नहीं लिया

अब मन में लगातार सवाल उठ रहे थे मष्तिस्क अनेकानेक प्रश्नो से क्रीड़ा कर रहा था

मानो हज़ारो सवाल किसी ने एक साथ पूछ लिए हो और एक का भी जवाब नहीं

फिर अचानक प्रश्नो से भरे मन ने एक अावाज दी कि

असफलता का मापदंड केवल शिक्षा में उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होने से नहीं मापा जा सकता

असफलता ज़िंदगी के किसी भी पड़ाव किसी भी हिस्से में कभी भी दस्तक दे सकती है

जैसे कि

किसी एक का अपने किसी नजदीकी को खो देना और उस दुःख पे काबू न कर पाना

जैसे कि

किसी का अपने माँ को खुश करने के लिए जीना पर माँ के चेहरे पे हसीं न होना

या फिर कोई और

ये सब भी असफलता है जो शिक्षा में मिली असफलता से कही अधिक बड़ी और व्यापक है

तो क्या इन असफलताओं का कोई दर्द नहीं कोई मोल नहीं??

क्या यह कहना उचित है की तुम नहीं समझ सकते क्यू की तुमने शिक्षा मे असफलता नहीं देखी??

विचार कीजिए

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