मनुष्य कई बार हारकर भी जीत जाता है और यही बयां कर रही है यह कहानी।

 

 

राज और राजन एक ही कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्र थे, वह दोनों ग्यारहवी कक्षा के छात्र थे। दोनों में आपस में दोस्त थे। राजू साधारण सा छात्र था, वह पढाई में भी सामान्य था और यही हाल राजन का भी था, वह भी साधारण सा छात्र था। राजन खेलने में बहुत अच्छा था और एक बेहतरीन खिलाड़ी भी था , उसने अपनी जिंदगी में खेलो से बहुत सारे मैडल हासिल किए थे जबकि राज बिल्कुल इसका विपरीत था, उसका प्रदर्शन खेलो में बहुत बुरा था और यही एक बात थी जो राज और राजन  को एक-दूसरे से अलग करती थी। पर इसके बावजूद भी यह दोनों अच्छे मित्र थे, इसके अलावा इनके मित्र राम, मनीष, राहुल और पंकज भी थे। यूँ ही सभी की तरह इन दोस्तों की यारी भी अच्छी चल रही थी। एक दिन विद्यालय से छुट्टी के बाद यह सारे दोस्त घर को जा रहे थे और साथ में इनकी खेलो की चर्चा भी साथ ही साथ चल रही थी। धीरे-धीरे चर्चा विकराल रूप लेने लगी और बात चर्चा से हटकर एक दूसरे का मज़ाक उड़ाने की हो गयी। राजन ने ऐसे ही राज को उसके खेल प्रदर्शन के लिए चिढ़ाने लगा और यह बात राज को बहुत बुरी लग गयी और तो और अब बात लड़ाई पर उतर गयी थी पर बाकी दोस्तों ने उन दोनों को समझाया और अलग-अलग कर दिया।

अभी भी राज को राजन की बात खटक रही थी और उसने जोश-जोश में आकर राजन को चुनौती दे डाली। हर वर्ष विद्यालय के वार्षिक खेल दिवस मनाया जाता था और इस बार भी यह आयोजन होने वाला था, इस खेल दिवस के दिन विद्यालय के सभी बच्चों की विभिन्न खेलो में प्रतियोगिता करायी जाती थी। राज ने इस बार खेल की दौड़ प्रतियोगिता में राजन को हराने की प्रतिज्ञा ले ली और राजन को चुनौती दे दी। यह सुनकर उनके सभी दोस्त अचम्भे में पड़ गए क्योंकि सभी जानते थे कि राज और राजन के खेलो में जमीन-आसमान का अंतर था और सभी जानते थे राज, राजन के सामने टिक ही नही पायेगा। इसीलिए सभी दोस्त राजन को समझाने लगे कि वह यह चुनौती वापिस ले ले पर राज कई बार कहने पर भी न माना।

उसका यह फैसला अटल था और वह यह कहकर वहाँ से अकेला ही अपने घर निकल गया। राज के पास केवल तीन महीने का समय था क्योंकि खेल प्रतियोगिता तीन माह बाद होने वाली थी और उसे गत वर्ष विजेता को हराना था। राज के लिए यह काम असंभव था पर चूँकि उसने फैसला ले लिया था इसीलिए उसके पास मेहनत करने के अलावा कोई और विकल्प नही था। उस दिन के बाद से तो मानो राज अपने सभी दोस्तों से कट गया हो, वह अब दोस्तों में किसी से भी ज्यादा बात नही करता था और राजन से तो बिल्कुल भी बात न करता था। अब राज को सिर्फ अपना लक्ष्य सूझता था और जब भी थोड़ा वक्त मिलता उसमे वह अपना अभ्यास करने लगता था। अब वह सुबह चार बजे जग जाता और फिर पार्क की ओर निकल जाता था। वह सुबह दो से तीन घण्टे दौड़ने का अभ्यास करता और फिर विद्यालय जाता, शाम को भी वह दो से तीन घण्टे अभ्यास करता रहता था। राज तो जैसे बिल्कुल बदल सा गया था और अब वह अपने खाने-पीने का भी बहुत ध्यान रखने लगा था, अब वह खिलाड़ियो की तरह तंदरुस्त रहने लगा था। इतनी मेहनत के बाद भला किसका खेल नही सुधरेगा?  दिनोदिन राज का खेल सुधरने लगा। उधर राजन भी भले विजेता रहा हो पर जब उसने राज को इतनी मेहनत करते हुए देखा तो उससे भी नही रहा गया और अब वो भी पहले से ज्यादा मेहनत करने लगा।

राजन ने भी अपनी दिन-रात एक कर दी थी। जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे थे दोनों का खेल सुधरता जा रहा था और दोनों अपनी मेहनत बढ़ा रहे थे। दोनों की मेहनत देखकर ऐसा लग रहा था, मानो दोनों में कांटो की टक्कर होने वाली है। ऐसे ही दोनों मेहनत करते रहे और तीन माह कब बीत गए पता ही न चला। अब वह समय आ गया था जब राज और राजन दोनों की अग्निपरीक्षा होनी थी जिसके लिए उन्होंने इतनी मेहनत की थी। इस बार की वार्षिक खेल प्रतियोगिता का दिन आ गया। इसमें सर्वप्रथम दौड़ की ही प्रतियोगिता होनी थी इसीलिए सभी भाग लेने वाले विद्यार्थियों को मैदान में बुल लिया गया। उसके बाद सभी नियमो की घोषणा हुई। दौड़ प्रतियोगिता दो चरणों में होने वाली थी। प्रथम चरण में सभी विद्यार्थियों को चार समूह में बाँट दिया गया। प्रत्येक समूह में आठ-आठ प्रतिभागी थे जिनको एक साथ दौड़ना था।

इन आठ में से केवल दो विद्यार्थी ही अगले और निर्णायक चरण में पहुँचने वाले थे। राज प्रथम समूह में था और पिछली बार का उपविजेता भी प्रथम समूह में था जबकि राजन तृतीय समूह में था। प्रथम समूह के सभी प्रतिभागी अपने-अपने निर्धारित स्थान पर पहुँच गए और जभी घण्टी बजी और सभी में दौड़ना शुरू कर दिया। राज की मेहनत और अभ्यास का असर यहाँ दिख रहा था और उसने शुरू से ही बड़ी तेज़ी से भागना शुरू किया और वह अपने समूह में सबसे आगे थे। पूरी फुर्ती के साथ राज दौड़ता रहा और उसने पिछली बार के उपविजेता को पछाड़ दिया था। सब प्रतिभागी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे थे और अंत में राज ने अपने समूह में प्रथम स्थान स्थान प्राप्त किया और जबकि गतवर्ष उपविजेता दूसरे स्थान पर रहा।

ऐसे ही दूसरे समूह की प्रतियोगिता समाप्त हुई और दो छात्रो का चयन हो गया। अब तीसरी समूह की बारी थी और इसमें राजन हिस्सा ले रहा था और घण्टी बजी सब प्रतिभागी दौड़ गए। जैसा की सभी को पता था राजन ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली और अंत तक वही आगे रहा। इस समूह में राजन ने जीत दर्ज़ की थी। इसी तरह अंतिम समूह की भी प्रतियोगिता हुई और दो विद्यार्थी चुन लिए गए। अब हर समूह से जीत हुए दो-दो विद्यार्थियो का आपस में मुकाबला था और यह निर्णायक मुकाबला था। इस अंतिम चरण में राज और राजन दोनों हिस्सा ले रहे थे और उन दोनों का आपस का मुकबला भी इसकी दिलचस्पी बढ़ा रहा था। तभी घोसणा हुई और सभी प्रतिभागी अपने निर्धारित स्थान पर आ गए, घण्टी बजी और सभी प्रतिभागी दौड़ पड़े। राज और राजन दोनों पूरी ताकत से दौड़ रहे थे।

धीरे-धीरे राजन ने राज को पछाड़ दिया और आगे निकल गया। राजन प्रथम स्थान पर दौड़ रहा था जबकि राज दूसरे स्थान पर था। काफी आगे निकलने के बाद राजन ने पीछे मुड़कर राज को देखा और इस गलती की वजह से दौड़ते-दौड़ते उसका पाँव मुड़ा और वह गिर गया। कुछ ही सेकंड में राज भी वहाँ पहुँचा और वहाँ रुककर राजन की मदद करने लगा पर राजन अब चल भी नही पा रहा था इसीलिए राज ने प्रतियोगिता छोड़ कर राजन को अपने कन्धे के सहारे उठाया और मैदान से बाहर लेकर जाने लगा। जबतक वह उसे बाहर तक ले गया प्रतियोगिता खत्म हो चुकी थी और गतवर्ष उपविजेता जीत चुका था।

इस वक्त राजन की आँखों में केवल आँसू थे, यह आँसू चोट के दर्द के नही बल्कि राज की त्याग के लिए था। अब राजन को अपनी गलती का अहसास हो रहा था और इसलिये वह राज से माफी मांगने लगा और कहा,”असली जीत तुम्हारी हुई,तुम भले ही प्रतियोगिता में न जीत पाये पर तुमने अपनी जिंदगी में बहुत बड़ी जीत हासिल की है।” अबतक राज भी भावुक हो चुका था और उसने कहा,”गलती मेरी भी है, तुम भी मुझे माफ़ कर दो।” अबतक वह चिकित्सा कक्ष तक पहुँच गए थे और वहाँ उनके सभी दोस्त भी आ गए थे। कुछ ही देर में एक शिक्षक वहाँ आये और राज को बधाई दी और कहा,” भले ही तुम प्रतियोगिता में नही जीत पाये पर किसी की मदद करके तुमने नैतिकता का कार्य किया है और इसीलिए तुम्हे मंच पर नैतिकता के पुरुस्कार के लिए बुलाया जा रहा है।” सभी दोस्त राजन के उपचार के बाद मंच के पास गए। वहाँ राज को पुरुस्कृत किया गया और इस बात के लिए सबसे ज्यादा ख़ुशी राजन को थी। वह समझ चुका था असली विजेता राज ही है। अब सब दोस्त वापिस मिल चुके थे और इससे बड़ी ख़ुशी की बात उनके लिए थी ही नही।..

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