एक मोहल्ले में पाँच दोस्त रहते है। उस मोहल्ले में कुछ दिनों से चोरी की बहुत घटना सामने आ रही थी। चोर को पकड़वाने के लिए एक दोस्त जासूस की तरह काम करता है। किस तरह से चोर को पकड़ा जाता पढ़िए इसमें…

 

रमेश, मनीष, राज, मोनू और रवि एक ही मोहल्ले में रहते थे। यह पाँचो बहुत अच्छे मित्र थे। इनकी दोस्ती को इनकी कालोनी में हर कोई जानता था। ये सभी कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी थे। इन पाँचो की उम्र लगभग उन्नीस-बीस की थी। सभी की तरह ये भी साथ खेलते घूमते फिरते थे। इनकी इस कॉलोनी में हर तरह के लोग रहते रहते थे। पर अधिकतर घरो में व्यापारी ही रहते थे कुछ के अपने घर थे और कुछ किराये पर रहते थे।इसका कारण यह था कि  ये कॉलोनी बाजार के सबसे नज़दीक थी। इस वजह से अक्सर कॉलोनी में नए नए लोग रहने आते रहते थे। इस कॉलोनी से आने जाने का केवल एक ही रास्ता था। वहाँ हमेशा एक चौकीदार रहा करता था। यूँ ही सब दोस्तों के दिन मजे में गुज़र रहे थे। ये पाँच दोस्त जरूर थे पर हर व्यक्ति की तरह इनका स्वाभाव भी भिन्न-भिन्न तरह का था। रमेश अपने सभी दोस्तों में सबसे भोला माना जाता था। वह सीधा सादा सा था। इसीलिए उसे सब दोस्त भोला-भोला कहकर चिढाते थे।

मनीष मज़ाकिया था। मनीष की आदत थी कि वह हर बात पर मज़ाक करना शुरू हो जाता था। राज और मोनू वैसे तो साधारण ही थे परन्तु ये दोनों किसी भी बात पर जल्दी गुस्सा हो जाते थे और मोनू तो बात-बात पर लड़ने को तैयार हो जाता था। रवि इन सभी दोस्तों में सबसे शांत और बुद्धिमान था। यही कारण था कि सभी दोस्त रवि को बहुत मानते थे। इन सभी दोस्तों में बहुत भाईचारा था। अगर इन्हें अपनी कॉलोनी की रौनक कहा जाये तो भी गलत न होगा। दिनभर खेलना, कूदना, घूमना-फिरना यही सब काम थे इस टोली के। ऐसे ही इनके दिन गुज़र थे। अचानक कुछ दिनों से कॉलोनी में चोरी की घटनाएँ सामने आ रही थी।

पिछले एक हफ्ते में कॉलोनी में तीन दिन चोरी हो चुकी थी। और तो और चोरी के अगली सुबह हमेशा चौकीदार बेहोश पाया जाता था। थाने में इसकी एफ आई आर भी दर्ज़ करायी जा चुकी थी। कालोनी की समिति भी इसके हल के लिए काफी कोशिश कर रही थी। रोज-रोज समिति व अन्य लोगो की सभाएं बुलाई जा रही थी। वही पुलिस भी तहकीकात में लगी हुई थी। पुलिस ने सभी लोगो से उनका बयान लिया जिनके घर चोरी हुई। फिर उन्होंने चौकीदार से पूछताछ करनी चालू की। चौकीदार से पूछने पर पता चला कि रात में उसे झपकी आ गयी और फिर जब वो नींद में था तभी अचानक किसी ने पीछे से उसका मुँह पकड़ लिया और फिर वो बेहोश हो गया। पुलिस आरोपी को नही ढूंढ पा रही थी। चोर के लिए कोई सुराग नही मिल रहा था। यही चर्चा पूरे कॉलोनी में कई दिनों से चल रही थी। इन पाँचो दोस्तों  भी यही बात रहे थे। पाँच दिन बाद जब मामला ठंडा पड़ गया तब एक दिन फिर से कालोनी में चोरी हुई। इस बार फिर चोर कई घरो में चोरी करके जा चुका था। इस बार रमेश के भी घर में चोरी हो गई थी। रमेश रात को अपने घर की छत पर सोया था।

उसने अपने सभी दोस्तों को बताया कि वो रात में लैपटॉप पर काम रहा था और फिर वही छत पर ही लैपटॉप रखकर सो गया और साथ ही उसका मोबाइल भी था पर जब वह सुबह उठा तो उसका मोबाइल और लैपटॉप गायब था। हर बार की तरह इस बार भी  चौकीदार गेट पर बेहोश पाया गया। इस बार भी पुलिस ने पूछताछ की पर कुछ फायदा नही। इस बार तो अब मोहल्ले में सी सी टी वी कैमरे लगवाने की चर्चा चल रही थी ताकि चोरी को रोका जा सके। पर इन पाँचो को दोस्तों को चोरी रोकने की नही चोर को पकड़ने की पड़ी थी। इसीलिए इन सबने इस समस्या को हल सोचने की कोशिश की। इसके लिए सभी दोस्तों को रवि ने अपने घर में शाम के छह बजे बुलाया। शाम के छह बजे सभी दोस्त वहा पहुँच गए। फिर उन्होंने चर्चा शुरू की।

रवि से शुरुआत से कहानी कहनी शुरू की। रवि ने कहा,” रात को चौकीदार को नींद आ जाती है और कुछ ही देर में कोई आता है और उसको कुछ सुंघा कर बेहोश कर देता है फिर वो कॉलोनी के अंदर आता है और चोरी करके चला जाता है”। तभी मनीष कहता है” चोरी के सुराग कही नही मिलते”,इसका मतलब चोर पूरी योजना के साथ चोरी करता है। इतना मनीष कह ही रहा था जभी मोनू कहता है, कि हमे कैसे पता कि चोर एक ही व्यक्ति है और रमेश तभी कहता है कि चोर शायद अकेला नही है। राज भी इनसब में हिस्सा लेते हुए कहता है,”इसका मतलब चोर कोई बाहर का ही व्यक्ति है”। काफी देर चर्चा चलती है पर कुछ पता नही चल पाता। अंत में रवि, राज  से उसका कैमरा मँगवाता है और कहता है,” सारी समस्या गेट से शुरू होती है तो हम भी गेट से ही शुरू करेंगे”। तकरीबन आठ बजे सब रवि के घर से निकलते है और कालोनी के गेट के पास जाते है और फिर मोनू और मनीष चौकीदार के साथ हँसी मज़ाक करने लग जाते है। और राज और रवि चुपके से कैमरा गेट के पास ही लगा देते है। काम होते ही रमेश मोनू और मनीष को इशारा कर देता है और वो चौकीदार के पास से निकल जाते है और अगले दिन फिर से उसी समय मिलने को कहकर सभी अपने अपने घर चले जाते है। अगले दिन निर्धारित समय पर सब मिलते है। फिर सब बनाये गए वीडियो को देखते है। वीडियो देखकर उस  दिन कुछ पता नही चलता है। क्योंकि अगले दिन कोई चोरी नही हुई। केवल हर रोज की तरह कुछ लोग आपस में चौकीदार से बात करते हुए नज़र आते है। और एक नई बात महेश जो कि कालोनी में तीन महीने पहले आया था, वो चौकीदार से हँस-हँस कर बाते करता है और फिर चाय लेकर आता है और अपने साथ चौकीदार को भी पिलाता है।

यह बात रवि को हज़म नही  हो रही थी क्योंकि केवल तीन महीने में महेश की चौकीदार से इतनी गहरी दोस्ती कैसे हो गयी कि वह चौकीदार को चाय पिला रहा है। पर रवि चुप रहता है तभी मनीष मजाकिया अंदाज़ में कहता है,”कही चोर को कैमरे के बारे में पता तो नही लग गया”। रमेश कहता है,”नहीं नहीं, मैंने अच्छे से नज़र रखी थी किसी ने कुछ नही देखा”। इतने में ही दरवाज़ा खुला और और रवि की बहन अंदर आई और कहने लगी, “अगर तुम्हारी गुप्तसभा खत्म हो गयी हो तो चाय नास्ता कर लो। फिर वो चली गयी। उसके बाद फिर से इनकी बातचित शुरू हो गयी। मोनू कहने लगा,” यह कैमरा भी कुछ काम नही आया,अब क्या करे”।

रवि कहता है,”कुछ नही एक दो दिन का इंतज़ार करते है, वैसे भी चोर कोनसा रोज-रोज चोरी करता है”। अंत में यह निर्णय हुआ कि वे कुछ दिन और इंतज़ार करते है। फिर सब अपने अपने घर चले गए। अगले दिन फिर कुछ नही हुआ। पर दूसरे ही दिन फिर से चोरी की घटना हुई। अगले ही दिन सुबह-सुबह सभी दोस्तों इक्कठे हुए और रवि के घर गए। वहाँ उन्होंने वीडियो देखी उसमे सारी घटना रोज की तरह थी पर करीब दो बजे एक आदमी गेट फांद कर अंदर आता है और रुमाल सुंघा कर चौकीदार को बेहोश कर देता है और आज भी चौकीदार उस वक़्त झपकी ले रहा था। चोर का चेहरा पूरी तरह से ढका हुआ था। इसी कारण वो फिर चोर का पता नही लगा पाये और फिर सभी अपनी अपनी राय देने लगे। अंत में निर्णय यह हुआ कि ये पूरी वीडियो समिति के प्रधान को दिखाई जाये।

सारे दोस्त निकल पड़े और अकेले में प्रधान को घटना से अवगत कराया। फिर यह वीडियो पुलिस को दे दिया गया। इसके बाद यह बात फैलने में बिल्कुल भी देर न लगी कि चोर कोई बाहर का आदमी है। इस घटना के बाद से इन दोस्तों की मोहल्ले भर में तारिफे होना शुरू हो गयी थी। फिर भी अभी भी चोरो का पता लगाना बाकी था। आपस में यह दोस्त लगे हए थे। फिर एक दिन चोरी की घटना हुई और इस बार चोरी समिति के कार्यलय में हुई थी। सी सी टी वी कैमरे के लिए लिया गया सारा चंदे का पैसा चोरी हो चुका था। यह बात कॉलोनी के लोगो को ही पता थी कि कार्यलय में चंदे का पैसा रखा गया है। इससे अब सभी लोगो को पता चल गया हो न हो ये व्यक्ति कालोनी का ही है। यही बात रवि व बाकी के दोस्तों को भी लग रही थी। पर जब उन्होंने उस दिन की वीडियो देखी तो सबकुछ पहली चोरी सा ही था।रवि ने कहा, कि केवल एक बात समझ नही आ रही कि चोरी वाले दिन ही चौकीदार क्यों झपकी ले रहा होता है कही ये ही तो चोर की मदद नही कर रहा”। रवि ने पर सबको ये बात किसी और को बताने से मना कर दिया। फिर दो दिन बाद जब सब दोस्त घूम रहे थे जभी अचानक राज ने कहा,” आज गेट पर दूसरा चौकीदार क्या कर रहा है”। सभी दौड़कर वहा जाते है और नए चौकीदार से पूछते है।

नया चौकीदार बताता है कि पुराना चौकीदार आज गांव जाने वाला हैं। यह सुनकर सब चिन्तित हो जाते है और उसी पर शक करने लगते है। फिर रवि कार्यलय जाकर पुराने चौकीदार का पता ले आया। उसके बाद सब दोस्त मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकल पड़े। वहाँ पहुँचने पर उन्हीने देखा चौकीदार अपना सामान बाँध रहा था। यह देखकर मोनू ने जाकर सीधे चौकीदार की कॉलर पकड़ ली और राजू ने भी उसका पूरा साथ दिया और उसे अपने साथ चलने को कहा।

उन दोनों ने उसे चोर कहना शुरू कर दिया। तब चौकीदार रोने लगा और बोला,”मै चोर नही हूँ, मेरा गाँव जाना बहुत जरुरी है,मेरी बहन की शादी है, मुझे कृपया कर के जाने दो”। यह बोलकर वो जोर-जोर से रोने लग गया। पर मोनू और राजू ने उस धमकाया और नाटक बन्द करके सच-सच बोलने को कहा। पर चौकीदार फिर वही कहने लगा। यह सुनकर रवि कुछ सोच रहा था। उसे भी लग रहा था कि चौकीदार ने यह काम नही किया है क्योंकि ये चौकीदार दस वर्ष से वही काम कर रहा था। फिर रवि ने सोचा शायद इसे कोई फंसाने की कोशिश कर रहा है। फिर रवि कहता है अच्छा पहले तुम ये बताओ कि तुम्हारे गांव जाने की बात किस किस को पता थी? चौकीदार कहता है,”ये बात केवल प्रधान और महेश को पता थी। क्योंकि महेश मेरा अच्छा दोस्त है इसीलिए ये बात मैंने उसे भी बताई थी। यह बात सुनकर रवि को पुरानी बात याद आ गयी और फिर पूरा शक महेश पर ही गया। फिर रवि ने पूछा ये बताओ कि महेश काम क्या करता है? चौकीदार ने कहा,”महेश अख़बार की प्रेस में काम करता है इसीलिए रात को काम क लिए जाता है और सुबह तक वापिस आ जाता है”। रवि उससे महेश के प्रेस का पता पूछा और चौकीदार ने वो उसे बता दिया।

रवि फिर उससे पूछता है,”तुम गांव से कितने दिन में आओगे”। चौकीदार कहता है,”चार दिन बाद”। इसके बाद रवि चौकीदार को छोड़ने के लिए कहता है। पर मोनू और राज छोड़ने को तैयार ही नही होते। काफी समझाने पर वो चौकीदार को छोड़ देते है। मोनू धमकी देता हैं,”अगर तुम चार दिन में न आये तो तुम्हारी खैर नही”। सारे दोस्त फिर वहाँ से निकल गए। रस्ते में मोनू केवल रवि को दोष दे रहा था। मोनू ने रवि को कहा कि सिर्फ तुम्हारी वजह से आज चोर हाथ से निकल गया। फिर रवि ने कहा, “चोर चौकीदार नही है”। राज ने फिर कहा कि चोर कौन है बताओ। रवि ने कहा कि ये तुम्हे मैं जल्द ही बताऊंगा। फिर रवि ने सबको घर भेज दिया और खुद प्रेस के लिए निकल गया। वहाँ जाकर उसने महेश के बारे में पता किया। उसे वहाँ पता चला कि महेश वहाँ काम ही नही करता।

अब तो रवि को पूरा यकीन हो गया था कि चोर महेश ही है। उसने घर आकर सबको  बुलाया। फिर रवि ने बताया कि चोर का पता लग गया है, चोर महेश है। और कहा पूरी बात मै तुम्हे बाद में बताऊंगा,अभी हमे उसे रंगेहाथ पकड़ना है। रवि ने फिर पूरी योजना सबको बताई। रवि ने कहा जैसे शिकार को पकड़ने के लिए उसको दाना डालते है वैसे ही हम उसे खुद चोरी के लिए आमन्त्रित करेंगे और मुझे पूरा यकीन है वो आज चोरी जरूर करेगा। आज रवि ने आज अपने घर का दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया और फिर सभी छुप कर इंतज़ार करने लगे। आज कुछ ऐसा ही हुआ, तकरीबन दो बजे चोर आया और घर का दरवाज़ा खुला देख घर में घुस गया। तभी सभी ने उसे रंगेहाथो पकड़ लिया। तत्काल पुलिस को बुलाया गया और प्रधान व समिति के अन्य सदस्य भी आये।

महेश को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उसके घर पर छानबीन की तो लगभग पचास लाख रूपये मिले।पुलिस ने सारा धन जब्त कर लिए। सभी ने रवि की बहुत तारीफ की। प्रधान ने रवि को दस हज़ार  व उसके दोस्तों को पांच-पांच हज़ार रुपये देने की भी घोषणा की। उसके बाद सभी अपने अपने घर चले गए। अगले दिन प्रधान ने सभी को सम्मानित किया व पुरुस्कार भी प्रदान किए। उसके बाद सभी रवि के घर मे मिले और सभी ने एक ही प्रश्न किया कि उसने कैसे पता लगाया चोर महेश ही है? रवि ने उन्हें पूरी कहानी बतानी शुरू की,” मुझे शक उसी दिन हुआ था जिस दिन हमने वीडियो में यह देखा था कि महेश रोज चौकीदार को चाय पिला रहा है क्योंकि महेश को केवल तीन ही महीने हुए थे आये हुए और उसकी इतनी दोस्ती कैसे हो गयी?

दरअसल महेश चौकीदार को नींद में सुलाना चाहता था ताकि वो उसे आसानी से बेहोश कर दे। इसीलिए वो रोज उसे चाय पिलाता था और जिस दिन उसे चोरी करनी होती थी उस दिन वो उसे नींद की गोलियां मिला देता था”। तभी फिर मनीष ने कहा,” महेश रोज ही क्यों नही चोरी करता था”। फिर  रवि  कहता है,” वो दो तीन दिनों में केवल एक ही बार वो ऐसा इसीलिए करता था क्योंकि अगर रोज ही चौकीदार सो जाता तो उसे शक हो सकता था कि महेश चाय में कुछ मिला रहा है। और जब हमे पता चला कि  कोई अंदर का ही आदमी चोरी कर रहा है तो उसने इसका इलज़ाम चौकीदार पर डालने की कोशिश की। क्योंकि वो जनता था कि चौकीदार गांव जाने वाला है और अगर चोरी के समय वो गया तो पूरा शक उसी पर जायेगा और उसपर किसी का शक जायेगा ही नही”। तभी रमेश बोला और अगर तुम नही रहते तो वो कामयाब हो भी जाता। सभी दोस्त फिर मुस्कुराने लगे। आज वो अपने जासूस दोस्त को पहचान गए थे।

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