यह कहानी पुर्णतः काल्पनिक है। इस कहानी में पशु के प्रेम को दर्शाया गया है। इस कहानी में मनीष नाम का बच्चा कुत्तो के बच्चे से बेहद प्रेम करता है। कुत्ते भी मनीष को चाहते थे। एक दिन कुत्तो ने अपनी जान पर खेलकर मनीष की जान बचाई। इसके कारण एक कुत्ता विकलांग हो गया।

 

रामनगर नाम का एक गांव था।उसी गांव में मनीष नाम का एक छोटा सा बच्चा था। उस समय उसकी उम्र यही कोई पांच-छह वर्ष रही होगी। वह अभी गांव के ही विद्यालय में प्रथम कक्षा में पढता था। उसके पिता एक किसान थे। एक दिन की बात है मनीष के घर के निकट ही एक कुतिया ने अपने बच्चों को जन्म दिया था। मनीष भोला सा मासूम सा एक बच्चा था। उसे कुत्ते के वे बच्चे बड़े ही प्यारे लगते थे। वह नित्य विद्यालय जाते व आते वक्त उन प्यारो बच्चों को देखता रहता था और मौका मिलते ही उनके साथ खेलने लगता था। कुछ ही दिनों में दो पिल्लो की मृत्यु हो गयी। अब केवल दो ही बच्चे बचे थे। उस दिन मनीष को बहुत ज्यादा दुःख हुआ। पर अब भी वह बाकी के दो पिल्लो के साथ खेल करता था। अगले ही दिन मौका पाकर मनीष घर से निकल गया और फिर उन दो पिल्लो को वह अपने घर ले आया। काफी देर तक वह उनके साथ खेला और फिर उसने अपनी माँ से अपने लिए दूध माँगा। मनीष वो दूध लेकर उन पिल्लो के पास आ गया और फिर उस दूध को कटोरी में निकाल कर उन बच्चों को भी पिलाने लगा। इतने में ही मनीष की माँ सामने आ गयी और उन्होंने सारा दृश्य देख लिए। पहले तो उन्हें बहुत गुस्सा आ गया परन्तु फिर मनीष के भोलेपन के ऊपर हँसी आ गयी।

किसी जानवर के प्रति उसकी दया देखकर  उन्हें खुशी हुई। मनीष काफी छोटा था इसीलिए मनीष की माँ ने मनीष को अपने पास बुलाया और प्यार से समझाने लगी कि वे उन बच्चों को उनकी माँ के पास छोड़ आये। जभी मनीष के पिता घर आ गए और उन्होंने जैसे ही उन पिल्लो को घर में देखा वैसे ही सवालों के ढेर लगा दिया। फिर मनीष की माँ ने मनीष के पिता को सारी घटना बता दी। उसके बाद उन पिल्लो को वापस उनकी जगह पर छोड़ कर आने को कहा। मनीष के पिता ने समझा बुझा कर मनीष को उन पिल्लो से अलग किया और फिर उन पिल्लो को उनकी माँ के पास छोड़ आये। इस दिन के बाद भी मनीष का प्रेम कभी भी उन पिल्लो के लिए कम नही हुआ। वो अब सुबह शाम घर से निकल जाता था और उनके साथ खेलता था। मनीष रोज अपने बिस्कुट उन्हें जरूर खिलाता था और रोज अपनी माँ से एक कटोरी में दूध माँगकर उन बच्चों को पिलाता था। कुत्ते के वे बच्चे भी अब मनीष के साथ खेलते थे व हमेशा उसका इंतज़ार करते थे। यह अब रोज की घटना थी। धीरे-धीरे कुत्ते के बच्चे भी बड़े होने लगे और साथ ही साथ मनीष भी बड़ा हो रहा था।

अब मनीष दस वर्ष का हो गया था और कुत्ते के बच्चे भी बड़े हो गए थे। चूँकि अब मनीष समझदार हो गया था और अच्छे से पढाई करने लगा था इसीलिए उसका उन कुत्तो के साथ खेलना बन्द हो गया था। परन्तु मनीष अभी भी रोज रोज विद्यालय जाते वक़्त उन कुत्तो को बिस्कुट जरूर खिलाता और फिर दो मिनट उनके साथ बैठकर उन्हें सहलाता और प्यार करता था। कुत्ते भी रोज मनीष का इंतज़ार करते रहते थे। धीरे-धीरे समय बीतता गया और कुछ वर्ष और बीत गए। अब मनीष ने आठवी कक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। गांव में आठवी कक्षा के बाद कोई विद्यालय नही था। इसके कारण बच्चों को पढ़ने के लिए शहर जाना पड़ता था।

सभी की तरह मनीष के पिता ने भी मनीष का दाखिला शहर के एक अच्छे विद्यालय में करा दिया। फिर एक दिन मनीष को लेकर उनके पिता घर से निकले और स्टेशन की तरफ चलने लगे। जभी उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो हैरान हो गए। आज भी मनीष उन कुत्तो के पास रुककर उन्हें प्यार से बिस्कुट खिला रहा था और उन्हें प्यार से सहला रहा था ऐसा लग रहा था मानो मनीष उनसे विदा मांग रहा हो। फिर मनीष वहा से खड़ा होकर चलने लगा। इसके साथ साथ कुत्ते भी चलने लगे उस वक्त ऐसा लग रहा था मानो कुत्ते मनीष को रोकना चाहते हो। धीरे धीरे वो स्टेशन पहुँच ही गए। कुत्ते भी स्टेशन पहुँच गए थे। मनीष ने अंतिम बार कुत्तो को सहलाया और वापिस भेजने की कोशिश की पर वो वही बैठे रहे। ट्रेन का वक्त हो गया था और वो प्लेटफार्म पर आ चुकी थी मनीष  व उनके पिता ट्रेन में सवार हो गए। कुछ ही देर में ट्रेन चल पड़ी। तब जाकर वो कुत्ते वापस गांव अ गए। कुछ दिनों तक तो कुत्ते भी मायूस से रहे फिर सब कुछ साधारण हो गया। मनीष के पिता भी कुछ दिनों में मनीष को छोड़कर वापस आ गए। धीरे-धीरे समय बीतता गया। मनीष भी शहर में मन लगाकर पढाई करने लगा। उसे कुत्तो की याद अब भी आती थी। वह समय-समय पर चिट्ठी लिखता था और हमेशा उसमे  कुत्तो के बारे में भी पूछता था। धीरे-धीरे दो वर्ष का समय बीत गया। मनीष दसवी कक्षा की परीक्षा देकर छुट्टियों में गांव आ रहा था।

मनीष की ट्रेन रात में आने वाली थी। इसीलिए मनीष के पिता मनीष को लेने के लिए स्टेशन गए। निर्धारित समय पर ट्रेन आ गयी। मनीष अपना सामान लेके ट्रेन से उतरा और अपने पिता के गले लग गया। इस मिलन के बाद दोनों सामान उठाकर चल पड़े। रात काफी हो चुकी थी। इसी वजह से उन्हें गांव जाने के लिए कोई गाड़ी नही मिली। तब उन्होंने ने पैदल ही रास्ता तय करने की सोची। वो दोनों पैदल ही निकल गए। काफी दुरी तय करने पर वह गांव के करीब सुनसान रस्ते पर पहुँच गए। वहाँ कुछ लुटरे छुप कर बैठे थे उन्होंने तुरन्त उन्हें घेर लिया। मनीष व उनके पिता चारो तरफ से घिर गए थे और एक चोर ने एक चाकू मनीष के गले पर रख दिया। उनके पास अब कोई रास्ता नही था लुटेरो उनका सामान मांगने लगे। मनीष के पिता सामान देने को तैयार हो गए पर मनीष नही मान रहा था। जभी वहाँ एक कुत्ता आ गया और उसने मनीष को पहचान लियाऔर तुरन्त भौक भौक कर अपने भाई को बुला लिया।

मनीष ने भले ही रात के अँधेरे में उन कुत्तो को न पहचाना ही पर उन दोनों कुत्तो ने रात मे भी मनीष को पहचान लिया था। उन दोनों कुत्तो ने झपट्टा मार कर उन लुटेरो पर हमला कर दिया। फिर तुरन्त मनीष व उसके पिता भी लुटेरो से लड़ने लगे। यह देख कर लुटेरो ने ताबड़तोड़ हमले करने शुरू कर दिए।और मनीष को बचाने के लिए कुत्ता बीच में आ गया। इस कारण एक कुत्ता काफी बुरी तरह से घायल हो गया उसकी पैरो पर काफी चोटे आई। कुछ ही देर में लुटेरे का चाकू गिर गया और उन दोनों कुत्तो की वजह से लुटेरे भाग खड़े हुए। मनीष व उसके पिता की जान तो सही सलामत बच गयी पर एक कुत्ता बुरी तरह से घायल हो गया था। फिर मनीष ने उस कुत्ते के पैर में तुरन्त अपना रुमाल बाँधा और गोद में उठा कर चल पड़ा। दूसरा कुत्ता भी उसके पीछे चल पड़ा।

आज ऐसा लग रहा था मानो दो मित्र कई वर्षो बाद मिला हो। वे सब कुछ ही देर में घर पहुँच गए। फिर मनीष ने बिना कोई देरी किए सबसे पहले कुत्ते के पाव में मरहम लगाकर पट्टी बांधी। फिर वो उन्हें सहलाने लगा। दोनों कुत्ते भी उसे चाटने लगे। आज बिछड़े हुए दोस्त मिल गए थे। आज अगर वे कुत्ते नही आते तो न जाने क्या होता। पर कुत्तो ने आज अपनी जान जोखिम में डाल कर मनीष की जान बचायी थी। मनीष ने उन्हें खाना खिलाया। फिर अगले दिन उसका उपचार करवाया। बहुत उपचार के बाद भी कुत्ते का पाव ठीक न हो पाया। एक कुत्ता अब लंगड़ा हो गया था फिर भी उसका मनीष से प्रेम कम नही हुआ था। मनीष ने उन कुत्तो को हमेशा के लिए अपने घर में रख लिया। इसी घटना से हर व्यक्ति एक पशु का प्रेम उसकी करुणा को समझ सकता है।

पशु ने भी अपना प्रेम अपनी वफादारी साबित कर दी थी।  पशु इंसान से इतना प्रेम कर सकता है पर क्या इंसान इतना प्रेम हर इंसान से कर सकता है? यह बात सुनने को बहुत आती है कि इंसान सभी पशुओं से बेहतर है पर क्या इंसान का व्यवहार ऐसा है? मानव क्या अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है? आप खुद समझ सकते है। आप अपनी गलतियों को कभी भी सुधार सकते है। सोचिये , विचारिये और समाज के लिए बेहतर कार्य करिए।

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