रवि सुबह से बड़ा बेचैन था, आज बारह बजे बाहरवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने वाला था। परिणाम का तो सभी छात्रो को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। रवि को भी अपनी परीक्षा का बेसब्री से इंतज़ार था, उसका यह इंतज़ार कुछ घण्टे में खत्म होने वाला था। सुबह से उसे एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था, जैसे-तैसे किसी तरह समय काटा और बारह बज गए, बोर्ड की परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। रवि ने बड़ी उत्सुकता से परिणाम देखा। इस बार रवि ने अस्सी प्रतिशत अंक प्राप्त करे थे, इसकी उसे बहुत ख़ुशी थी। रवि की मेहनत रंग लाई थी, उसने इस बार अपनी पूरी कक्षा में सबसे अधिक अंक प्राप्त करे थे। इस ख़ुशी से वह फुला न समा रहा था, घर में भी सब खुश थे। परिणाम के बाद से ही घर में सभी मित्रो, रिश्तेदारों और जानकार लोगो के फ़ोन आ रहे थे, सभी रवि को उसके अच्छे परिणाम के लिए बधाई दे रहे थे। कुछ दिन यूँ ही ख़ुशी में बीत गए। अब उसे कॉलेज में आगे की पढाई के लिए दाखिला कराना था। कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन शुरू हो गए थे, रवि ने भी आवेदन कर दिया। रवि के बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक थे, इस कारण उसे दाखिल लेने में कोई परेशानी नही हुई, उसका दाखिला आराम से हो गया। कुछ ही दिनों में कक्षाएं शुरू हो गई, रवि पढ़ने कॉलेज जाने लगा। रवि शाम को कॉलेज से घर आता, शाम को थोड़ी देर पार्क में टहल लिया करता, कभी-कभी दोस्तों के साथ फुटबॉल भी खेल लिया करता। कुछ दिनों में रवि के कॉलेज में कुछ दोस्त बन गए थे, कुछ दिनों में नियमित रूप से पढाई भी शुरू हो गई थी। अब रवि को कॉलेज और अपनी पढाई से ज्यादा वक्त न बचता था, इस कारण शाम को उसका पार्क जाना बन्द हो गया था। यूँ ही दिन बीतने लगे, लगभग एक महीना बीत गया। एक महीने बाद कॉलेज में विभिन्न प्रकार के खेलो के लिए विद्यार्थियो की चयन प्रक्रिया शुरू हो गई। विभिन्न प्रकार के खेलों में फुटबॉल भी शामिल था।

रवि की कुछ महीनो पहले से ही फुटबॉल में दिलचस्पी बढ़ गई थी, उसने कॉलेज में फुटबॉल के खेल के लिए आवेदन कर दिया। फुटबॉल के लिए खिलाड़ियो का चयन दस दिन बाद शुरू होना था। पूरे कॉलेज से फुटबॉल के लिए कुल बीस खिलाड़ियो का चयन होना था। रवि ने आवेदन के बाद से रोज शाम को वक़्त निकालना शुरू कर दिया, वह शाम को फुटबॉल का अभ्यास करने लगा। दस दिन बाद खिलाड़ियो के चुनाव का दिन आ गया। कुल बयालीस छात्रो ने फुटबॉल के खेल में आवेदन किया था, इनमे से किन्ही बीस का ही चुनाव होना था। छात्रो को चार दलो में बाँट दिया गया, दो दल ग्यारह-ग्यारह के थे और दो दस-दस के, इनका आपस में मुकाबला था। इसी मुकाबले से कोच को बेहतरीन खिलाड़ियो का चुनाव करना था। पहला मुकाबला शुरू हुआ, अधिकतर खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुछ देर बाद दूसरा मुकाबला भी शुरू हुआ, इस मुकाबले में रवि भी खेल रहा था। रवि ने खेल में जी-जान लगा दी, पर इसके बावजूद कई खिलाड़ी उससे बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे थे, रवि ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया। निर्धारित समय पर खेल समाप्त हुआ। इसके परिणाम की घोषणा अगले दिन होनी थी। सभी खेल के बाद अपने घर को निकल गए, सभी को परिणाम का इंतज़ार था। रवि भी परिणाम का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। रवि ने जैसे-तैसे दिन काटा, अगले दिन सुबह जल्दी तैयार होकर वो कॉलेज को निकल गया। कुछ देर में वह कॉलेज पहुँच गया था, तबतक बोर्ड पर परिणाम की सूची नही लगी थी। सभी को परिणाम जानने की जल्दी थी। कुछ देर में परिणाम की सूची बोर्ड पर लगा दी गई। सभी अपना-अपना नाम सूची में ढूंढने में लगे हुए थे, रवि भी अपना नाम देखना लगा, क्रम संख्या एक से देखना शुरू किया और फिर उसकी ऊँगली नीचे की ओर खिसकने लगी, दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी, आखिर में क्रम संख्या सोलह पर उसे अपना नाम दिख ही गया। क्रम संख्या खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अनुसार थी, रवि ने अपना नाम सूची में पाया तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। फुटबॉल के खेल में चयनित होने की ख़ुशी से उसके रोम-रोम खड़े हो गए थे। अभी रवि पंद्रह खिलाड़ियों से पीछे था, अब उसका लक्ष्य अपना प्रदर्शन सुधार के खेल में पक्के तौर पर स्थान बनाने का था। दो दिन बाद से प्रतिदिन कॉलेज में फुटबॉल का अभ्यास होना था। रवि ने इसके लिए कमर कस ली। अब फुटबॉल के लिए उसकी दिनचर्या में खास स्थान था, दिन का एक बड़ा हिस्सा उसके फुटबॉल के लिए खर्च होता था।

रवि रोज सुबह और शाम दोनों वक्त पार्क जाने लगा, कुछ देर व्यायाम करने के बाद घण्टों फुटबॉल खेलता। शाम को तो फुटबॉल खेलने के लिए कई दोस्तों का साथ मिल जाता था, लेकिन सुबह उसे किसी दोस्त का साथ नही मिल पाता था, तब वह अकेला ही फुटबॉल खेलने का अभ्यास करने लगा था, उसके बाद कॉलेज में भी पूरी लग्न से खेलता। इतने अभ्यास का असर उसके खेल पर दिख रहा था, दिन गुज़रने के साथ-साथ उसका प्रदर्शन बेहतर हो रहा था। सिर्फ रवि ही नही कॉलेज के बाकि फुटबॉल के खिलाड़ी भी जी-जान से खेल रहे थे, उनका भी प्रदर्शन दिनों-दिन बेहतर हो रहा था। आखिर सभी खिलाड़ी अपनी जगह सुनिश्चित करना चाहते थे, इसीलिए रोज अच्छे से अभ्यास करते थे। यूँ ही दो महीने बीत गए। इन दो महीनों के बाद सभी खिलाड़ियो के खेल की गुणवत्ता जांचने के लिए तीन दिन का एक खेल कार्यक्रम आयोजित किया गया।

फुटबॉल के खेल में कुल अठारह खिलाड़ियों को अपने खेल का प्रदर्शन दिखाना था, इन अठारह में अबतक रवि का सोलहवाँ स्थान था, अब उसके पास इससे आगे बढ़ने का मौका था। तीनो दिन अठारह खिलाड़ियो को नौ-नौ के दो दल बाँट कर खेल कराया जाता था, हर दिन दो प्रतियोगिता होती थी, तीन दिन में कुल छः। सभी खिलाड़ियों ने तीनों दिन अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेला। फुटबॉल कोच द्वारा सभी खिलाड़ियों के खेल प्रदर्शन का आकलन किया गया। इन तीन दिनों में कोच ने सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बारीकी से देखा, सभी की खामियों और खूबियों पर गौर किया। इस दिन कोच ने किसी भी खिलाड़ी से खेल के बारे में कोई खास बातचीत नही की और सभी को अगले दिन बुलाया। अगले दिन सभी खिलाड़ी निर्धारित समय पर कॉलेज के मैदान में पहुँचे, रवि भी निर्धारित समय पर ही मैदान पर पहुँचा। कोच ने सभी खिलाड़ियों को खेल कक्ष में बुलाया। खेल कक्ष में पहुँचने पर पता चला कि उनके प्रदर्शन के अनुसार नामो की सूची दीवार पर लग चुकी थी। सभी खिलाड़ी ख़ुशी-ख़ुशी अपना नाम सूची में देखने लगे, रवि भी मन ही मन बहुत खुश था, उसे लग रहा था कि उसका प्रदर्शन काफी बढ़िया हो चुका है और निश्चित ही उसने पदोन्नित की होगी, ख़ुशी-ख़ुशी वह भी अपना नाम सूची में देखने लगा। रवि ने जल्द ही अपना नाम सूची में ढूंढ लिया था, उसका नाम सूची में पंद्रहवें क्रम पर था, वह निराश हो गया, उसके प्रदर्शन में उम्मीद से काफी कम सुधार आया था, वह सोलहवें स्थान से पंद्रहवें स्थान पर ही आ पाया। परिणाम देखकर उसके चेहरे पर मायूसी आ गई थी, कुछ खिलाड़ियों के प्रदर्शन में काफी सुधार आया था, तो कुछ के प्रदर्शन में कमी आई थी, खेल कक्ष में अब खिलाड़ियों का मिलाजुला माहौल था, कुछ खुश थे तो वही कुछ निराश। रवि को आगे बढ़ने के लिए अब और अधिक मेहनत की आवश्यकता थी। उस दिन के बाद से रवि का परिश्रम और बढ़ गया। जब वक़्त मिलता वो फुटबॉल के अभ्यास में लग जाता। उसकी मेहनत रंग लाने लगी थी, उसका खेल धीरे-धीरे सुधरने लगा। धीरे-धीरे वक़्त बीता और राज्य स्तर की प्रतियोगिता का वक्त आ गया। इस प्रतियोगिता में रवि का कॉलेज भी हिस्सा लेने वाला था। इस प्रतियोगिता के लिए कोच सर ने अंतिम बार सभी खिलाड़ियों की परीक्षा ली।

सभी खिलाड़ियों ने कोच सर को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाया। कोच सर ने सभी खिलाड़ियों के खेल का मूल्यांकन किया, तत्पश्चात प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की सूची तैयार की गई। सूची में खिलाड़ियों का नाम व क्रम उसके प्रदर्शन के अनुसार था। उस सूची में रवि का नाम क्रम संख्या बारह पर था। इस बार रवि का प्रदर्शन पिछली बार से बेहतर था, उसे इस बात का दुःख हो रहा था कि वह अभी भी स्थाई रूप सर्वश्रेष्ठ ग्यारह में जगह नही बना पाया था, पर इस बात की तस्सली थी कि वह पहले से बेहतर है और वह भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाला है । प्रतियोगिता के लिए रोज कॉलेज में नियमित अभ्यास होने लगा। वक़्त के साथ ही प्रतियोगिता शुरू हुई। सभी को इस प्रतियोगिता का बेसब्री से इंतज़ार था। रवि ने भी इस प्रतियोगिता के लिए बहुत अभ्यास किया था, भले ही वह स्थाई खिलाड़ियों में नही था, फिर भी वह खुश था कि कभी न कभी उसे मौका मिलेगा। कॉलेज के पहले खेल में रवि को अंतिम पांच मिनट में खेलने का मौका मिला, पर वह पांच मिनट उसे अपना जलवा दिखाने के लिए काफ़ी नही थे, पहला खेल रवि के कॉलेज ने दो-एक से अपना नाम किया। कॉलेज के दूसरे खेल में एक खिलाड़ी चोटिल हो गया और इसका लाभ रवि को मिला और उसे अपने दल में जगह मिल गई। दूसरे खेल में रवि ने तकरीबन तीस मिनट तक खेल खेला, वो इस दौरान गोल तो न कर पाया, पर उसने बेहतरीन खेल दिखाया। इस खेल के बाद रवि का आत्मविश्वास बढ़ गया। अगले खेल में रवि ने शुरू से ही आक्रमक रूप अपना रखा था, बहुत बेहतरीन खेल का नमूना पेश किया जा रहा था। इस बेहतरीन खेल का लाभ रवि को व उसके कॉलेज को मिला, रवि ने अंतिम पन्द्रह मिनट में अपने कॉलेज की तरफ से एक गोल दाग दिया। इस गोल के होते ही कॉलेज के सभी खिलाड़ी ख़ुशी से झूम उठे, राज्य स्तर की प्रतियोगिता में अपनी जिंदगी का पहला गोल करते ही रवि की आँखों में आंसू आ गए, उसका चेहरा उसकी ख़ुशी बयां कर रहा था। इसी गोल के दम पर रवि के कॉलेज ने एक-शून्य से विजय प्राप्त की और सेमीफाइनल के लिए प्रस्थान किया। इस खेल के बाद रवि के चेहरे पर एक रौनक थी, एक ख़ुशी थी, एक आत्मविश्वास और एक संतोष झलक रहा था।

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