महाराष्ट्र में एक छोटा सा जिला है लातूर, पिछली गर्मियों में वहाँ पानी की हालत इतनी दयनीय हो गयी थी की जिस देश में गंगा जैसी पावन नदी बहती है, उसके होने के बावजूद लोग पानी की किल्लत की वजह से दम तोड़ रहे थे! उसी दर्द को बयां करती यह कहानी- लातूर के नलों की जुबानी!

 

विकिपीडिया पेज पे भारत रत्न के विषय में पढ़ते समय दो बातों का पता चला पहला की भारत रत्न भारत का सर्वोच्च ‘नागरिक सम्मान’ है और दूसरा की यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है !  तो न जाने क्यों मन में ये ख्याल आया कि, क्यों न लातूर के हर उस नल को जिसमे बूँद-बूँद ही सही पर पानी आ रहा हो, उसे देश का नागरिक घोषित कर दिया जाए और इसके तत्पश्चात भारत रत्न के सम्मान से नवाजा जाए! कम से कम इसी बहाने ‘सो कॉल्ड ह्यूमन बिंग्स’ की फेक लिस्ट में कुछ अच्छे ह्यूमन तो जुड़ेंगे ! अब तो लातूर के नल भी गर्दन झुकाए मायूस खड़े हैं ! ऐसा लगता है मानो, कई अरसा बीत गया हो जब इसके नब्ज में पानी बहा करता था ! अब तो जैसे सदियों से नब्ज सूखी पड़ी है, लातूर के नल भी जैसे चीख-चीख के बस यही गुहार लगा रहे हो कि, या तो अब हमारी नब्ज काट दो नहीं तो हमें शहीद घोषित कर दो कम से कम इस बहाने सरकार जो रूपया देगी उससे जरूरतमंद लोग ‘बोतल बंद पानी’ तो खरीद सकेंगे !

अब तो वहां के लोगों का ये हाल है कि उनके आँखों से निकली वो अश्क की बूँदें भी बीच सफर में ही सूख जाती हैं उनके लबों तक पहुचे तो कम से कम ख्याल आये पानी का स्पर्श कैसा था! अब तो खुदा से भी यही दुआ है कि या तो तोड़ डाल लोगों के आस से भरी बाल्टी की रस्सी नहीं तो डाल दे सारे जहाँ के दरिया को कुएं में!  इस देश के लिए सच में ये कितनी शर्म की बात है कि जिस देश में प्राण- दायिनी गंगा बहती है उसी देश का नागरिक आज पानी के एक कतरे के लिए दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं!

Share If You Care!

Responses