अमन एक मायूस व चुपचाप रहने वाला बच्चा था। उसका स्तर पढाई में भी काफी बुरा था। उसका वयवहार बिल्कुल अलग था। क्या उसके अंदर कोई बदलाव आया,क्या वो ठीक हो पाया?

 

अमन आठवीं कक्षा का छात्र था। उसकी उम्र तकरीबन चौदह वर्ष थी। देखने में अमन सभी की तरह बिल्कुल साधारण सा था पर हमेशा मायूस सा रहता था। उसके चेहरे पर उसकी मायूसी उसका अकेलापन झलकता था। ऐसा लगता था जैसे उसके मन पर बोझ हो। कक्षा में उसका कोई मित्र नही था। वह हमेशा कक्षा में अंतिम बेंच गुमसुम सा  बैठता था । उसका कक्षा में कोई मित्र भी नही था। न कोई अमन से बात करता और न ही अमन किसी से बात करता था। अमन अपने अध्यापको के प्रश्न के उत्तर भी सही से नही देता था। पढाई में उसका स्तर बहुत ही बुरा था। अमन पिछले दो वर्ष से बड़ी ही मुश्किल से पास हो पा रहा था। शिक्षक भी हमेशा उसकी बुराई ही करते रहते थे। कक्षा में उसे सभी विद्यार्थी उसे सदैव चिढाते रहते थे और उसे अपने से छोटा ही समझते थे।

अमन का ऐसा ही व्यवहार विद्यालय के बाहर भी था। अमन का उसके मोहल्ले में भी कोई दोस्त न था और न ही उसकी किसी भी व्यक्ति से कोई बातचीत थी, घर में भी वह चुपचाप ही रहता था। घर में उसके माता-पिता दोनों उससे कई बार बात करने की, समझाने की कोशिश की पर कुछ फायदा नही हुआ। अमन पार्क भी जाता था तो अकेला ही बैठा रहता था। खेलने से तो जैसा उसका कोई ताल्लुक ही नही हो। इसके ऐसे व्यवहार के कारण का पता किसी को भी न था पर उसकी बुराई करने में कोई भी न चूकता था। पर कक्षा में एक छात्र ऐसा भी था जिसे अमन की स्तिथि पर दया आती थी। इसका नाम राजू था। राजू, अमन से बात करना चाहता था पर उसके बाकी दोस्त उसे ऐसा करने से मना कर देते थे। इसीलिए वह भी अमन से कभी भी बात न कर पाया। ऐसे ही दिन व्यतीत हो रहे थे।

एक दिन विद्यालय में एक नए शिक्षक आये और यह शिक्षक आठवीं कक्षा को ही पढ़ाने वाले थे। इस शिक्षक का व्यवहार बिलकुल ही अलग था। इस शिक्षक का नाम अमित था। यह बिल्कुल मस्तमौला और मज़ाकिया थे। बच्चों से बिल्कुल दोस्तो की तरह बात करते थे। उनकी उम्र तकरीबन तीस वर्ष रही होगी। इनका विषय विज्ञान और गणित था। अगले दिन यह पहली बार अपनी कक्षा में पढ़ाने आये और यह कक्षा वही थी जिसमे अमन पढता था। पहले दिन आकर उन्होंने अपना परिचय सभी बच्चों को दिया और फिर सभी सभी बच्चों से उनका परिचय देने को कहा। एक एक कर के सभी बच्चों ने अपना परिचय देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पूरी कक्षा ने अपना परिचय दे दिया और अब अमन की बारी थी। अमन अभी भी बिल्कुल शान्त सा बैठा हुआ था। अध्यापक ने अबकी बार अमन से पूछा,”तुम्हारा नाम”। अमन अपने स्थान से खड़ा हुआ और बोला,” अ अ अ….,अमन”। शिक्षक अबतक समझ चुके थे  कि अमन शायद डरा हुआ है। फिर उसे कुछ बोले बिना ही कक्षा में पढ़ाना  शुरू कर दिया। इनके पढ़ाने के अंदाज़ बिल्कुल ही अलग था। बड़े ही आराम से और साधारण उदाहरण देकर हर बात समझा रहे थे। आजतक इन बच्चों को ऐसा किसी ने भी नही पढ़ाया था। उन्होंने सभी बच्चों को खेल खेल में ही सब कुछ अच्छे से पढ़ा दिया था। इसीलिए आज सभी बच्चे खुश नज़र आ रहे थे।

देखते ही देखते कक्षा का समय हो गया और किसी को पता भी नही चला और तभी घण्टी बजी और अमित जी कक्षा से चले गए। अगले दिन फिर वो कक्षा में आये उन्होंने फिर उसी तरह से पढ़ाना शुरू किया। पढ़ाते-पढ़ाते उनकी नज़र अमन पर पड़ी, अमन आज भी रोज की भाँति अंतिम बेंच पर चुपचाप सा बैठा था। अमित जी भाँप गए थे अमन का ध्यान पढाई में नही है पर वह फिर चुप रहे और पढ़ाने लगे। उन्होंने गौर किया की जब पूरी कक्षा हँस रही होती है तब भी वह गुमसुम सा रहता था। आज भी उन्होंने अपने समय तक पढ़ाया और फिर कक्षा से चले गए। अगले दिन  फिर वो अपनी कक्षा में आये और पढ़ाना शुरू किया। पर आज उनकी नज़र शुरू से ही अमन पर थी, पुरे समय उन्होंने उसे ही देखा। फिर अपनी कक्षा समाप्त होने पर चले गए।

अगले दिन भी उन्होंने नियमानुसार पढ़ाना शुरू किया और आज भी वो अमन को ही देख रहे थे। आज भी अमन का ध्यान पढाई में नही था। आज फिर उनसे रहा नही गया और उन्होंने अमन से एक प्रश्न पूछ ही लिया। अमन चुपचाप सा खड़ा हो गया। उसे कुछ न पता था और पता भी कैसे रहता उसका ध्यान तो कही और ही था। जभी पूरी कक्षा में सभी बच्चे हँसने लगे और कुछ तो उसका मज़ाक भी उड़ाने लगे। उस वक्त अध्यापक ने बच्चों को डाँटा और सबको शांत करा दिया। फिर उन्होंने अमन को भी बैठने को कह दिया। पर उन्हें अबतक अमन के ऐसे व्यव्हार के लिए कुछ भी समझ नही आ रहा था।

वह अपनी कक्षा खत्म होने पर चले गए। पर उसके बाद भी उनके दिमाग में वही सब बाते चल रही थी। अब भी वह केवल और केवल अमन के बारे में ही सोच रहे थे। आज अमित जी ने बाकी अध्यापको से  बात की और सभी ने एक ही बात बात बोली कि अमन बिल्कुल निकम्मा है और उसका पढाई में बिलकुल भी मन नही लगता है। अमित जी ने इसका कारण जानना चाहा पर कोई भी इसका कारण नही जानता था। अब अमित जी के मन में केवल एक ही बात थी कि उन्हें अमन को ठीक करना होगा।

अगले दिन अमित जी ने कक्षा में पढ़ाया और अंत में अमन को अपने साथ चलने को कहा। अमन सहमा सहमा सा अपनी जगह से खड़ा हुआ और उनके साथ चल पड़ा। अमन को अबतक समझ नही आ रहा था कि उन्हें अध्यापक ने किसलिए बुलाया है। वह मन ही मन सोच रहा था कि उससे ऐसी क्या गलती हो गयी जिसके लिए उसे बुलाया जा रहा है। फिर उसने चुप्पी तोड़ ही दी और अपने शिक्षक से बोलना शुरू कर दिया,”सर मैंने क्या गलती की है?”। शिक्षक ने भी हँसते-हँसते कहा कि तुमसे कोई गलती नही हुई है और हमेशा तुम ऐसा मत सोचा करो कि तुमसे ही कोई गलती हुई है। फिर अमित जी ने उससे पूछा,” तुम इतने चुपचाप क्यों रहते हो और क्या तुम्हारा मन पढाई में नही लगता?”। पर अमन ने इस प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया। अमित जी ने कई बार पूछा। अंत में अमन ने कहा,” ऐसी कोई बात नही है, मुझे बस अकेला ही रहना पसंद है”। इस उत्तर से अमित जी को अभी भी पूरी संतुष्टी नही मिली थी पर पर फिर भी उन्होंने उसे जाने को कह दिया। उन के ऊपर अब एक ही धुन सवार हो गयी थी। किसी भी तरह से उन्हें अमन की इस समस्या को दूर करना था।

अगले दिन कक्षा में आकर उन्होंने सबसे केवल एक ही प्रश्न किया। उन्होंने सभी को उनके मित्रो के नाम बताने को कहा। सभी ने अपने अपने दोस्तों के नाम बताने शुरू कर दिया। अंत में आज फिर उन्होंने अमन को अपने दोस्तों के नाम बताने को कहा। अमन आज फिर चुपचाप खड़ा था। आज अमन उत्तर तो देना चाहता था पर उसके पास कहने को कुछ न था। फिर जब शिक्षक ने पूछा तो उसने उत्तर दे ही दिया कि उसका कोई मित्र नही है। फिर शिक्षक ने पूरी कक्षा में पूछा,”क्या तुमसे कोई भी अमन का दोस्त नही है?”। पूरी कक्षा में सन्नाटा छा गया। ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई कक्षा में हो ही नही। फिर शिक्षक ने कहा,”तुम्हारी कक्षा में ही पढ़ने वाला एक छात्र रोज अकेला बैठता है पर कोई उससे बात तक नही करता है ऐसा क्यों है?”।  इसका भी उत्तर किसी छात्र ने नही दिया। शिक्षक ने आज सभी को पढ़ाना छोड़कर नैतिक शिक्षा दी। आज राजू को अपनी गलती का अहसास हो रहा था क्योंकि अपने दोस्तों की बात में आकर उसने कभी भी अमन से बात न की और न ही दोस्ती की। अब राजू चुप नही रहना चाहता था इसीलिए वो आज अपने शिक्षक के साथ ही कक्षा से निकला और बोलने लगा,” सर मुझे आपसे कुछ कहना है”।

शिक्षक ने कहा,” हाँ हाँ क्यों नही “। फिर राजू ने कहा,” मै भी अमन से बात करना चाहता था, उसकी ऐसी हालात देखकर मुझे भी बुरा लगता था पर मेरे दोस्त मुझे ऐसा करने से मना करते रहते थे”। शिक्षक ने फिर उसे समझाया कि दूसरो की बातो पर ज्यादा ध्यान नही देना चाहिए, अगर तुम्हे कुछ अच्छा लगता है तो तुम वैसा ही करो। इसके बाद शिक्षक ने राजू से अमन के बारे में पूछा। राजू ने कहा,” वैसे तो मुझे अमन के बारे में ज्यादा  नही पता है”। फिर उसने बताना शुरू किया। अमन छठी कक्षा में इस विद्यालय में आया था। इससे पहले वो गांव में रहता था। जब अमन इस विद्यालय में आया था तब उसे सब बच्चे गांव के नाम पर चिढाते रहते थे। यह सब बाते सुनकर अमित जी को बहुत दुःख हुआ। फिर उन्होंने उसे अपनी कक्षा में जाने को कह दिया।

अब अमित जी को अमन की कुछ कुछ परेशानी समझ आ रही थी।  एक दिन शाम को अमित जी पास ही एक पार्क में टहलने गए। उन्होंने उस दिन अमन को भी पार्क में देखा। अमन एक कोने में एक बेंच पर बैठा हुआ था। जबकि उसकी उम्र के सभी बच्चे खेल रहे थे। उसे अकेला देखकर अमित जी भी वहाँ जाकर अमन के साथ बैठ गए। अमन ने देखकर उन्हें अनदेखा कर दिया। फिर उन्होंने अमन से बात करने की कोशिश की पर अमन फिर भी चुपचाप ही रहा। पर अमित जी भी लगातार काफी सारे प्रश्न पूछते रहे। अमन ने सभी प्रश्न के उत्तर तो नही दिया पर कुछ प्रश्न के उत्तर दे दिए। इतनी कम बातचीत पर भी शिक्षक ने अनुमान लगा लिया था कि कोई भी अमन को अपने साथ नही खिलाना चाहता है। पर शिक्षक अमन की अमन की आँखों से समझ चुके थे कि अमन को खेलना पसंद है। अब तक अँधेरा होना शुरू हो चुका था और इसीलिए अमन भी अपने घर की ओर निकल पडा। अमन के जाने के बाद अमित जी भी अपने घर की ओर निकल पड़े। अगले दिन विद्यालय के बाद आज फिर अमित जी पार्क के लिए निकल पड़े।

आज अमित जी काफी जल्दी ही पार्क आ गए थे और आज वो अपने साथ एक फुटबॉल भी लेकर आये थे। आज अबतक अमन पार्क नही आया था। अमित जी वहीँ अमन का इंतज़ार करने लगे। कुछ देर बाद अमन भी पार्क आ गया और अपने बेंच पर जाकर बैठ गया। अमित जी भी आज फिर उसी बेंच पर जाकर बैठ गए। उसके बाद उन्होंने आज फिर बात करने की कोशिश की पर कुछ फायदा नही हुआ। अमन आज भी शांत बैठा हुआ था। फिर अमित जी खड़े हो गए और अमन को खेलने को आमन्त्रित किया पर अमन न आया। अजीत जी ने अमन को काफी समझाया पर कुछ फायदा नही हुआ। आज अमित जी को फुटबॉल अकेले ही खेलना पड़ा। इसके बाद वह अपने घर निकल गए। आज उन्हें निराशा हाथ लगी थी फिर भी उन्हें विश्वास कि भले देर हो सकती है पर वह जरूर कामयाब होंगे। अगले दिन विद्यालय जाकर उन्होंने अमन के घर का पता लगाया। उसी दिन वो शाम को अमन के घर पहुँच गए। अमन के घर पर उसकी माँ थी। अध्यापक ने उन्हें अपना परिचय अमन के शिक्षक के रूप में दिया।

अमन की माँ हैरान हो गयी। उन्हें यह समझ नही आ रहा रहा था कि अध्यापक उनके घर पर क्यों आये है। अमन की माँ मन ही मन सोच रही थी कि जरूर अमन ही कोई गलती की होगी। उन्होंने अध्यापक से पूछा,”अमन से कोई गलती हुई है क्या?”। अध्यापक ने कहा,” नही नही, अमन ने कोई गलती नही की है पर बात मैं उसके लिए ही करने आया हूँ। फिर अमन की माँ अमित जी के लिए नास्ता ले आई। अध्यापक ने फिर अमन की माँ से अमन के इस अजीब से व्यवहार के बारे में पूछा। अमन की माँ ने कहा, सर मै भी अमन के इस व्यवहार के बारे में कुछ नही जानती, मैंने उसे बहुत बार पूछा पर उसने कोई उत्तर न दिया। मैंने उसे कई बार समझाने की भी कोशिश की पर कुछ फायदा नही हुआ। मुझे समझ नही आ रहा है कि हमारे बेटे को किसकी नज़र लग गयी। पर हमारा अमन पहले ऐसा बिल्कुल नही था।”।

इतना कहते कहते अमन की माँ भावुक हो गयी उनकी आँखों में आँसू आ गए थे। उन्होंने अपने आँसू पोंछे फिर कहना शुरू किया,” अभी से दो वर्ष पहले हम सब इस शहर में नही रहते थे। हम सब गांव में रहते थे। अमन भी हमारे साथ वही रहता था और वही पढता था। अमन ने अपने शुरुआत की पढाई गांव के विद्यालय में ही की है। अमन पहले पढाई में बिल्कुल भी ऐसा नही था। अमन अपनी पढाई में बहुत ही होशियार था। वो अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आता था। वह अपने सभी अध्यापको का चहेता था। पढाई ही नही बल्कि अमन सभी खेलो में भी बहुत अच्छा हुआ करता था”। फिर अमन की माँ अलमारी से अमन के प्रमाण पत्र, सर्टिफिकेट और मैडल निकालकर ले आई और अमित जी को दिखाने लगी। अमित जी की अब आश्चर्य की कोई सीमा नही रही थी। अमन के ये सर्टिफिकेट और मैडल उसके बारे में कुछ और ही बयां कर रहे थे। अमन शुरुआत से हर कक्षा में प्रथम आया था और खेलो भी वह कई बार मैडल जीत चुका था। इन सबका प्रमाण देखकर अध्यापक दंग रह गए। अमित की माँ ने फिर बताया कि अमन के पिता का कुछ वर्ष पहले तबादला हो गया और इसी कारण उनका पूरा परिवार शहर आ गया था।

तब अमन के पिता ने उसका एक बढ़िया से विद्यालय में दाखिला करा दिया था। फिर अमन की माँ ने कहा,” पता नही शहर में आकर अमन को क्या हो गया उसका पूरा व्यवहार ही बदल गया”। अमित जी अब अमन के बारे में काफी बात जान चुके थे। उन्होंने जाते जाते अमन की माँ को कहा, ” मैं पूरी कोशिश करूँगा कि आपको आपका पुराना अमन मिल जाये”। फिर अमन की माँ ने अमित जी का ध्यनवाद किया। इसके बाद अमित जी वहाँ से निकल पड़े। चलते चलते वो बस अमन के बारे में ही सोच रहे थे। उन्होंने अमन की माँ की बात को और राजू की बात को जोड़कर देखा। उन्हें अब काफी हद तक परेशानी की वजह समझ आ चुकी थी।

उन्हें पता चल चुका था कि अमन शुरुआत से ही सभी से नाकारा गया है और इस कारण वो धीरे-धीरे अकेला होता गया। सोचते सोचते अमित जी अपने घर पहुँच गए उन्हें रस्ते की दूरी का कुछ पता ही न चला। इसी वजह से आज वो पार्क नही जा पाये थे। अगले दिन अमित जी फिर अपनी कक्षा में पहुँचे। आज उन्होंने कक्षा में कुछ अलग देखा। आज अमन अकेला नही बैठा था, उसके साथ आज राजू भी बैठा हुआ था पर वो दोनों बैठे अंतिम बेंच पर ही थे। मन ही मन अमित जी को बहुत खुशी हो रही थी। फिर उन्होंने आज उन दोनों को आगे बुलाया और सबसे आगे वाले बेंच पर बिठा दिया। फिर उन्होंने अमन से ध्यान लगाकर पढ़ने को कहा।

उन्होने फिर पढ़ाना शुरू कर दिया। काफी देर पढ़ाने के बाद आज अमित जी ने सभी बच्चों से एक एक प्रश्न करने शुरू किए। सभी बच्चों ने उत्तर दिया। किसी का उत्तर सही था तो किसी का गलत। ऐसे ही अमन का नम्बर भी आ गया। अमित जी ने आज अमन से बिल्कुल आसान सा प्रश्न किया। यह प्रश्न एक गुणा करने का था और निश्चित ही यह प्रश्न तीसरी या चौथी कक्षा के लायक हुआ। चूँकि प्रश्न इतना आसान था इसीलिए आज अमन ने इसका जवाब सही सही दे दिया। अमित जी उसका उत्तर सुनकर बहुत खुश हो गए और उन्होंने उसके लिए पूरी कक्षा में तालियां बजवा दी। आज सभी बच्चों को यह समझ नही आ रहा था कि अध्यापक ने इतने आसान प्रश्न पर इतनी तारीफ क्यों कर दी, फिर भी किसी ने कुछ न कहा। अमित जी जानते थे भले ही प्रश्न बहुत आसान हो पर उसके उत्तर से कही न कही अमन का आत्मविश्वास जरूर लौटेगा। अमित जी फिर अमन की तारीफ करते हुए उसे और अच्छे से पढ़ने को कहा और फिर कक्षा से चले गए।

उन्होंने राजू को अपने पास बुलाया। राजू तुरन्त ही अपने शिक्षक से मिलने के लिए गया। आज अमित जी ने राजू को ध्यनवाद कहा और फिर कहा,” आज तुमने सबकी परवाह किये बिना अमन के साथ बैठकर बहुत अच्छा किया”। उसे कुछ हिदायत दे कर शिक्षक ने कक्षा में वापिस भेज दिया। आज अमन के चेहरे पर ही एक छोटी सी मुस्कुराहट थी और इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ अमित जी को ही जाता है। आज भी रोज की भाँति अमन शाम को पार्क में अकेला बैठा हुआ था। जभी अमित जी भी पार्क पहुँचते है और जाकर अमन के पास बैठ जाते है। आज फिर वो अमन से बात करने की कोशिश करते है और आज उनका मकसद केवल और केवल अमन को हँसाने का रहता है। काफी देर बातचीत के बाद अमित जी की कोशिशों को सफलता मिलती है और अमन एक सेकंड के लिए जोर से हँसता है और फिर एकदम से चुप हो जाता है। फिर वो पहले सा चुपचाप हो जाता है।

इतनी देर में समय का पता ही नही चलता है और अँधेरा होना लगता है। दोनों अपने अपने घर की ओर निकल पड़ते है। आज घर जाते वक्त अमित जी के चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी झलक रही है और निश्चित ही यह ख़ुशी अमन के व्यवहार में सकरात्मक परिवर्तन के कारण ही थी। अब उन्हें अपने उद्देशय में सफलता मिलनी शुरू हो चुकी थी। आज अमन के चेहरे पर भी एक अलग सी ख़ुशी झलक रही थी और शायद यह ख़ुशी इसीलिए थी कि आज काफी दिनों बाद किसी ने उसकी तारीफ कर दी थी।

आज अमन अपने आप को बिल्कुल अकेला महसूस नही कर रहा था। आज घर पहुँच कर अमन ने अर्से बाद अपनी माँ से बैठकर आराम से दस मिनट बात की। अमन की माँ को इस बात पर हैरानी हुई पर आज वो बहुत खुश थी। आज उन्होंने अमन के चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी देखी थी। अब उनके मन में खोई हुई आस फिर से जाग उठी थी। उन्हे लग रहा था हो न हो इसमें उसके नए अध्यापक का ही हाथ है। अगले दिन निर्धारित समय पर फिर से कक्षा शुरू हुई आज अमन और राजू दोनों ही प्रथम बेंच पर बैठे हुए थे। यह देख उनके शिक्षक को ख़ुशी हो रही थी। उन्होंने आज फिर अमन को सबकुछ ढंग से समझने को कहा। आज अमन पर न जाने क्यूँ अमित जी की बातो का असर हो रहा था। आज अमन ने पूरी कक्षा में ध्यान लगाकर पढाई की।

आज भी अध्यापक ने अमन से एक आसान सा प्रश्न किया, पर आज का प्रश्न आठवी कक्षा का ही था। अमन ने आज बिना हिचकिचाहट के इस प्रश्न का उत्तर सही सही दे दिया। उत्तर सुनकर अध्यापक को बड़ी ही ख़ुशी हुई और उन्होंने कक्षा में जमकर तारीफ भी की। फिर अध्यापक ने उसे प्रोत्साहित किया और  फिर चले गए। अमन आज अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया था। आज उसने राजू से भी बात करना शुरू कर दी थी।  आज अमन ने अपनी कक्षा में एक मित्र बना लिया था और वह था राजू। आज अमन के मन में अपने शिक्षक के लिए इज़्ज़त भी बढ़ गयी थी और अब वो उन्हें अपना प्रिय शिक्षक मानने लगा था। रोज की भांति आज भी अमन पार्क आया था और आज भी वह पार्क में अकेला बैठा था। पर आज उसकी नज़रे किसी को ढूँढ रही थी।

शायद वो अपने शिक्षक की राह देख रहा था। फिर एकदम से उसके चेहरे पर ख़ुशी आ गयी क्योंकि अमित जी भी पार्क आ गए थे। आज अमित जी अपने साथ फुटबॉल भी लाये थे। आज फिर अमित जी अमन के पास जाकर बात करने लगे और आज अमन भी उनसे आम इंसान की तरह बड़े आराम से बाते कर रहा था। फिर कुछ ही देर में अमित जी ने उसे फुटबॉल खेलने के लिए आमन्त्रित किया। शुरू में तो अमन हिचकिचाया पर अमित जी के बार-बार कहने पर वह तैयार हो गया। फिर अँधेरा होने तक दोनों फुटबॉल खेलते रहे।

अँधेरा होने पर दोनों घर के लिए निकल पड़े। आज अमित जी ने अमन से एक प्रश्न किया,”तुम पढाई में इतने होशियार थे तो इतना पिछड़े कैसे?”। इतना सुनते ही अमन को अपनी पुरानी बाते याद आ गयी पर आज चुप रहने की बजाय उसने सब कुछ बताना शुरू किया। उसने कहा,” आप सही ख रहे है पहले मैं बहुत होशियार था साथ ही मैं बहुत जिज्ञासु भी था। जब मै इस विद्यालय में आया तो मै सबसे बात करना चाहता था पर कोई मेरे साथ बात ही नही करता था और तो और सब मुझे देहाती देहाती कह कर मज़ाक उड़ाते थे। और तो और सब मेरी भाषा पर भी मज़ाक उड़ाते रहते थे। इस कारण मैं पूरी कक्षा में अकेला सा पड़ गया था। फिर भी मैंने अपनी पढाई चालू रखी और फिर एक दिन मैंने एक शिक्षक से जाकर एक प्रश्न पूछा। उन्होंने मुझे समझाने की बजाय डाँट दिया और कहा, यह बहुत आसान है खुद ही पढ़ लो। तब से मैं बिलकुल टूट गया और मैं अपने आप को बिल्कुल अलग समझने लगा”।

यह सब सुनकर अमित जी को बहुत दुःख हुआ। फिर उन्होंने उसे सांत्वना दी। अबतक अमन का घर आ गया था और वो अपने घर चला गया। आज अमन अपने घर हँसते-हँसते पहुँचा। उसकी माँ उसे ऐसे देखकर बहुत खुश हुई। मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे एक माँ को उसका खोया हुआ बेटा मिल गया हो। आज अमन ने दिल खोलकर अपने माता पिता से बात की। आज अमित जी को भी बहुत ख़ुशी हो रही थी। आज उन्होंने कामयाबी की एक और सीढ़ी पार कर ली थी। अब रोज अमन और राजू कक्षा में आगे बैठने लगे थे। अब रोज राजू कक्षा में ध्यान लगाकर पढ़ने लगा था। रोज शाम को अमन अपने अध्यापक के साथ फुटबॉल खेलने लगा था। जिस दिन भी अमित जी को थोड़ी भी देरी हो जाती थी उस दिन अमन बैचैन हो जाता था। धीरे-धीरे अमन की पढाई का स्तर भी बढ़िया होते जा रहा था। अब वह साधारण सा हो गया था। इसी दिनचर्या के साथ दिन बीतते गए और सभी की वार्षिक परीक्षा आ गयी।

अमन ने भी पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी। कुछ ही दिनों में परिणाम का दिन आ गया। आज सभी विद्यार्थी अपने अपने माता पिता के साथ आये थे। अमन भी अपने माता-पिता के साथ विद्यालय पहुँचा था। परिणाम की घोसणा शुरू हुई। आज अमन ने अपनी कक्षा में तृतीय स्थान प्राप्त किया था। उसके माता-पिता और उसके अध्यापक बहुत खुश थे। सभी को बड़ी हैरानी हो रही थी कि अमन इतनी जल्दी इतना कैसे बदल गया। इसका उत्तर अमन व उसके माता-पिता और अमित जी स्वयं भी जानते थे। अमन की इस कामयाबी का श्रेय सिर्फ और सिर्फ अमित जी को ही जाता है। इसके लिए अमन के माता-पिता अमित जी का ध्यनवाद करते है। अमित जी ही वह शख्स थे जिन्होंने एक छात्र की जिंदिगी बदल दी थी। उन्होंने अमन को नई जिंदगी दी थी। अमन अब होनहार छात्रो में शामिल हो चुका था।

वह अब नौंवी कक्षा में पहुँच गया था। उसकी कक्षा में अब उसके कई सारे दोस्त बन गए थे। कई सहपाठियो ने उससे माफ़ी भी मांगी। अब वह भी सभी बच्चों से बात करता और सभी के साथ खेलने लगा था। इसके बावजूद आज भी वह राजू को ही अपना प्रिय मित्र मनाता था। अमन निरन्तर पढाई में मन लगाता रहा अपने शिक्षक की सभी बाते मानता रहा। धीरे-धीरे एक वर्ष और बीता और नौंवी कक्षा की भी परीक्षा आ गयी। इस परीक्षा में भी अमन ने मन लगाकर पढाई की। इसी कारण अमन ने इस बार अपनी पूरी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिंदगी धीरे-धीरे यूँ ही बीतते गयी और एक वर्ष और गुज़र गया।

इस बार अमन के सामने मैट्रिक की परीक्षा थी। इस परीक्षा में भी अमित जी ने अमन का मार्गदर्शन किया। अमन में पूरी मेहनत के साथ यह परीक्षा दी। कुछ महीने बाद परिणाम घोषित हुआ। इस बार वो अपने विद्यालय में ही नही बल्कि पूरे राज्य में प्रथम  आया था। इसका श्रेय उसने अपने शिक्षक को ही दिया। उसे मुख्यमंत्री ने स्वयं पुरुस्कार प्रदान किया। वह उस पुरुस्कार को लेकर सीधा अपने प्रिय शिक्षक के पास पंहुचा। उसने सर्वप्रथम उनसे आशीर्वाद लिया और फिर उसने अपना पुरुस्कार अपने शिक्षक को देते हुए कहा इसके हक़दार आप ही है। शिक्षक ने उसे पुरुस्कार वापिस किया और बोला, “यह तुम्हारी मेहनत का पुरुस्कार है”। आज दोनों की आँखों में आँसू आ गए थे पर यह आँसू ख़ुशी के आँसू थे। आज अमन एक अच्छे शिक्षक का महत्व समझ चुका था।…

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