रमेश नाम का एक विद्यार्थी अपने दो मित्रो के साथ पढता है, जिनका नाम राजू और गोपाल है। आपस में तीनो एक दूसरे की मदद करते है। रमेश राजू को अच्छा मित्र मानता है क्योंकि वह सदैव हर गलत सही बात में साथ देता है जबकि गोपाल सैदव सच्ची बात करता है और भलाई की बात करता है जो कभी कभी रमेश को बुरी लगती है।एक बार शक की वजह से गोपाल की दोस्ती टूट जाती है।और रमेश हमेशा परीक्षा में राजू पर निर्भर रहता है।वार्षिक परीक्षा में राजू किसी कारणवस मदद नही कर पाता जिसकी वजह से रमेश अनुतीर्ण होता है।तब गोपाल की बाते रमेश की आँख खोल देती है ।रमेश को अपने सच्चे मित्र की पहचान हो जाती है।

 

रमेश कक्षा सात का छात्र था। कक्षा में दो उसके परम मित्र थे राजू और गोपाल । रमेश संपन्न घर से था, वही राजू और गोपाल निम्न घर से थे। इसी वजह से आये दिन उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।परंतु एक अच्छे दोस्त होने के कारण रमेश सदैव अपने दोनों दोस्तों की मदद करता रहता था।और इसी वजह से दोनों दोस्त रमेश को बहुत मानते थे।

वैसे तो रमेश के दोनों ही अच्छे मित्र थे परंतु रमेश फिर भी राजू को गोपाल से ज्यादा मानता था।इसका कारण यह था की राजू सदैव रमेश का साथ देता था उसकी हाँ में हाँ मिलाता था वे जबकि गोपाल हमेशा केवल अच्छे कामो में साथ देता था और समय समय पर नसीहत भी देता था जो की कभी-कभी रमेश को अच्छी नही लगती थी।रमेश पढाई में साधारण था जबकि राजू और गोपाल पढाई में बहुत होशियार थे।

गोपाल और राजू हमेशा रमेश की मदद भी करते थे।गोपाल राजू को हमेशा अपने साथ पढ़ाता था और पूरी कोशिश करता कि रमेश भी अधिक से अधिक समझ पाये वही राजू पढाई के नाम पर उसे यह कहकर टाल देता था कि परीक्षा में तो वह मेरे साथ ही बैठेगा तब बता दूंगा कोई दिक्कत नही है।क्योंकि राजू का क्रमांक रमेश से एक कम था और गोपाल का क्रमांक राजू से एक कम था । इसीलिए यह तीनो परीक्षा में भी साथ-साथ बैठते थे।और राजू हर परीक्षा में रमेश की मदद जरूर करता था। इसी वजह से रमेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाता था। इसी तरह खेलते पढ़ते कुछ महीने गुज़र गए और प्रथम सत्र की परीक्षा आ गयी।

इस परीक्षा में भी हर बार की तरह इस बार भी हर विषय की परीक्षा में राजू ने रमेश की मदद की किन्तु आखिरी विषय की परीक्षा में राजू बीमारी की वजह से अनुपस्थित रहा।और इस परीक्षा में रमेश ने गोपाल से मदद मांगी , गोपाल ने उस समय मदद से इंकार कर दिया और कहा की वह बाद में अच्छे से पढ़ा देगा।इसी कारण से रमेश प्रथम सत्र के एक विषय की परीक्षा में उत्तीर्ण नही हो पाया और उसने इसका सारा दोष गोपाल को ही दिया। गोपाल ने उसे बहुत समझाने की कोशिश भी की पर कुछ नही हुआ।ऐसी हालत में फिर राजू ने खुद दोनों से बात करके सुलह करवाई और तीनो फिर से दोस्त बन गए।इस परीक्षा के बाद भी कुछ फ़र्क नही पडा और रमेश पढाई में लापरवाही करते रहा और उसकी हर बात में साथ देता रहा। दोनों विद्यालय में रोज तरह-तरह की शरारते करते रहते थे।दोनों को ऐसा करते देख गोपाल उन्हें सदैव समझाता की वो गलत कर रहे है।उन्हें समझाने की पूरी कोशिश करता पर फिर भी कुछ नही होता था।राजू गोपाल को डरपोक कहकर चिढ़ा देता था और उसकी बात माननें से इंकार कर देता था।

दिनों दिन दोनों की शरारते बढ़ती जा रह थी।और फिर रमेश का पढाई में मन नही लगता था।इसी वजह से वो विद्यालय के बहाने घर से निकलता और बाहर घूमता रहता था और इसमें उसका पूरा साथ राजू भी देता था। दोनों ने गोपाल को भी कई बार आमंत्रित किया था परन्तु उसने मना कर दिया और उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की कि यह गलत है, परन्तु वो नही माने । फिर गोपाल ने भी बोलना छोड़ दिया। गोपाल अब पढाई में बहुत ध्यान दिया करता था। इसकी वजह से उसका पढाई का स्तर दिनों दिन बढ़ते जा रहा था। वही रमेश का पढाई का स्तर गिरते जा रहा था। राजू भी अब पहले से कम पढता था पर वो गृह पर अधिक मेहनत करके अपने पढ़ाई को ठीक कर लेता था। समय बीतने के साथ-साथ अब रमेश और राजू अधिक घूमने लगे।वो रोज विद्यालय के लिए निकलते जरूर थे पर विद्यालय नही जाते थे। वे इस समय इधर-उधर घुमा करते थे।

धीरे-धीरे ये कार्य उनके लिए नियमित होते जा रहा था। फिर एक दिन विद्यालय के एक अध्यापक ने राजू और रमेश को घूमते हुए देख लिया, उन्होंने  विद्यालय की ही वर्दी पहनी हुई थी। अगले दिन यह बात अध्यापक ने प्रधानाचार्य को बताई।प्रधानाचार्य ने दोनों के माता-पिता को विद्यालय बुलाया और उन्हें पूरी घटना से रूबरू करवाया और दोनों को डाटा। फिर घर में भी दोनों के माता-पिता ने दोनों को बहुत डाँटा और पढ़ने की सख्त हिदायत दी।इस घटना के बाद रमेश ने सारा शक गोपाल पर किया क्योंकि केवल वही यह बात जनता था। अगले दिन विद्यालय में रमेश ने सारे आरोप गोपाल पर लगा दिए। गोपाल ने बहुत समझाने की कोशिश की पर रमेश ने उसकी एक बात भी नही सुनी, और रमेश ने फिर गोपाल से दोस्ती तोड़ दी और इस बार राजू ने भी कोई मदद नही की।इस फैसले में वो भी रमेश के साथ था। इस बात का गोपाल को बहुत दुःख हुआ। इसके बाद से रमेश कक्षा में उपस्थित तो रहता था पर अभी भी उसका पढाई में मन बिलकुल नही लगता था और अभी भी वह लापरवाह था।

अब राजू पढाई में दोबारा मन लगाने की कोशिश कर रहा था। ऐसे ही कई महीने बीत गए और वार्षिक परीक्षा आ गयी। रमेश ने यह सोचकर पढाई नही की कि परीक्षा में उसे राजू सबकुछ बता ही देगा तो अभी पढ़ने का क्या फ़ायदा । इसबार की सभी परीक्षा में रमेश अकेला पड़ गया क्योंकि राजू दूसरी पंक्ति के आखिर में बैठा जबकि रमेश तीसरी पंक्ति में प्रथम स्थान पर , इससे दोनों दोस्त अलग हो गए। और रमेश परीक्षा में कुछ नही लिख पाया। उसके सभी विषय में यही हाल रहा। सभी विषयो में वो कुछ भी बढ़िया नही कर पाया। और इस बार उसे कही से भी मदद नही मिली।वो अपने आप को अकेला महसूस कर रहा था।

फिर इसी तरह सभी परीक्षा समाप्त हुई । कुछ दिनों बाद  परीक्षा के परिणाम निकलने का दिन था। सभी विद्यार्थी परिणाम के लिए विद्यालय आये थे। रमेश , राजू और गोपाल भी परीक्षा के परिणाम के लिए आये थे। परिणाम घोसित हुआ, गोपाल ने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था, वही राजू ने भी बढ़िया अंको से परीक्षा उत्तीर्ण की जबकि रमेश उत्तीर्ण नही हो पाया।

परिणाम पाने के बाद रमेश एक पेड़ के नीचे बैठा था। वहां पहले राजू आया और उसने उसे सांत्वना देने की कोशिश की, राजू ने उसे कहा की इसबार तेरी किस्मत ख़राब थी तू अगली बार जरूर उत्तीर्ण होगा और फिर उससे कुछ देर बात करके चला गया। फिर वहा गोपाल आया और उसने रमेश से बात की । गोपाल ने कहा, रमेश तुम्हारे साथ बुरा हुआ, कोई बात नही अगली बार मै तुम्हारी पूरी मदद करूँगा और तुम भी मेहनत करना और अपनी मेहनत से उत्तीर्ण होना। गोपाल की बातो में थोड़ी भी चापलूसी नही थी, आज उसकी बाते रमेश को प्रोत्साहित कर रही थी क्योंकि उसकी बाते सच्ची थी।

रमेश को पुरानी सभी बाते याद आ रही थी , हर बार गोपाल ने उसके भले के लिए काम किया और समझाने की कोशिश की थी परन्तु वह नही समझ पाया। यह सब सोचते-सोचते उसकी आँखों में आँसू आ गए और उसने गोपाल को गले से लगा लिया। गोपाल को एक पल समझ भी नही आया कि उसके साथ क्या हुआ है। गोपाल ने फिर उसके आँसू पोछे और फिर दोनों ने हाथ मिला लिया। इतनी बाते सुनने के बावजूद जब गोपाल मदद के लिए आया तो रमेश को अपनी गलती का अहसास हो चूका था । उस दिन रमेश माफ़ी मांगता है,गोपाल भी उसे माफ़ कर देता है । आज रमेश को अपने सच्चे मित्र की पहचान होती है और वो दिन उसकी जिंदगी का बहुत खूबसूरत दिन था। दोस्त तो राजू भी था परन्तु उसने असलियत में रमेश का  कभी भी भला नही किया था । उसने रमेश को आत्मनिर्भर बनाने की बजाय सदैव निर्भर बनाया था। जबकि गोपाल ने उसे हमेशा आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की थी। आज ये बात रमेश भी समझ गया था और उसने आज खोया हुआ सच्चा  दोस्त पा लिया था।

Share If You Care!

Responses