Author: Prince Kumawat

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तो उस रात भी हर बार की तरह मेरे दिल ने मुझसे कहा की मुझे उससे बात कर लेनी चाहिए फिर क्या था मैंने अपना सेल उठाया और उसको कॉल मिला दिया हमेशा की तरह ही उसने फिर कहा प्रिंस तुझे क्या होता है कि जब भी मुझे जरुरत होती है, जब भी मैं परेशान…

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तो उन रास्तों से आना जाना मेरा रोज़ का हिस्सा था हमेशा की तरह में अपनी धुन में मस्त गाते गाते सोचता सोचता निकल ही रहा था कि उन जानी पहचानी दो आँखों ने मुझे अपनी अोर खींचा उसने अपना चेहरा ढके हुए था मेने गाड़ी रोकी और उसकी तरफ बढ़ा पर दो पल के…

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तो गाडी अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ रही थी, हम सब मंजिल से थोड़ा ही दूर थे क़ि रास्ते में एक चौराहा पड़ा| हमेशा की तरह ही वहा छोटे छोटे बच्चे अपनी जीविका चलाने के लिए कुछ न कुछ बेचने मे व्यस्त थे, गाड़ी चलने ही वाली थी कि मेरा ध्यान अपनी 4 वर्ष की…

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ज़िंदगी भी अजीबोगरीब है, न जाने कब कहा और क्यों?? बहुत कुछ नया सिखाती है राहों पे चलते चलते दोड़तें दोड़तें हर एक मोड़ पर नया आयाम दे जाती है जो आज सच लगता है कल शायद झूठ दिखे अथवा विपरीत आज जो विचार किसी विषय को लेके है वो जरुरी नहीं कल भी वेसे…