Category Archives: अति लघु कहानियां

माँ का जादू

  जहाँ एक ओर रंग-बिरंगे कागज़ के टुकड़ो के पीछे भागती इस अंधी भीड़ को देखकर, सब कुछ इतना उलझा-उलझा सा लगता है। वहीँ पेचेदगियों से भरे उस ऊन को गोले को, ‘माँ’ के हाथों में करतब खाता हुआ देखकर, सब कुछ जैसे कितना सुलझा-सुलझा सा लगता है।।

पुराना बुढा आदमी

  एक पुराना घर है , कोने में एक पुरानी कुर्सी पड़ी है, सुना है जब नयी थी, तब उसके आस-पास खूब चहल-पहल हुआ करती थी, अब तन्हा सी पड़ी हैं । उसी घर में एक पुराना बुढा आदमी रहता है, सुना है जब नया हुआ करता था तब !  

अनाथ

खुदा को भी अपने हर बन्दे की खैरियत का ख्याल है, तभी तो, हर रात सुकून की नींद की खातिर, सहलाने आती है हवा । अनाथ है वो , माँ उसकी लोरी सुनाने आती नहीं ।।

आजादी

बक्शे में बंद एक तिरंगे ने दुसरे तिरंगे की कान में फूस-फसाया, की सुना है आजादी का दिन पास आ गया है ? चलो अच्छा है, एक दिन के लिए ही सही फिर से हमें, आवारा बन, मदमस्त हवाओं की उन लहरों को चूम, कुछ वक़्त के लिए ही सही, ‘आजाद’ होने का एहसास तो…