Category Archives: कविता

पर मैसेज नहीं आया

तो उन रास्तों से आना जाना मेरा रोज़ का हिस्सा था हमेशा की तरह में अपनी धुन में मस्त गाते गाते सोचता सोचता निकल ही रहा था कि उन जानी पहचानी दो आँखों ने मुझे अपनी अोर खींचा उसने अपना चेहरा ढके हुए था मेने गाड़ी रोकी और उसकी तरफ बढ़ा पर दो पल के…

जब वो साड़ी पहनती है

जानता हूं मैं कि जानती है वो मुझसे बेहतर कैसी मोहब्बत चाहिये मुझे आखिरकर यूं खुल के कभी कहा नहीँ उससे पर आज उसकी नज़रों ने कुछ ऐसी क़यामत बरपायी कि पूरे कपड़ों में आज मुझे वो ‘दैहिक-आनंद’ की साक्षात प्रतिमा नजर आयीं अपनी निगाहों की बेसब्र उंगलियों से उसकी हर वक्रता को टटोलता उस,…