Category Archives: प्रेरणा

बदलाव

  आज विद्यालय में बच्चों की दो महीने की गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो रही थी। हर बच्चे को इन छुट्टियों का बहुत इंतज़ार रहता था, हरीश को भी इन छुट्टियों का बहुत इंतज़ार था। आज उसे ये ख़ुशी मिल रही थी।  हरीश एक दस-ग्यारह वर्ष का साधारण सा नटखट बच्चा था, वह अभी पाँचवी…

सज़ा

यह कहानी है एक ऐसे इंसान की है जिसने नि:स्वार्थ होकर दो बेकसूरों की जिन्दगी बचायी|   राघव सिन्हा सरकारी विभाग में एक बड़े अधिकारी थे| लम्बा चौड़ा कद, सपाट और चमकता चेहरा, हल्का गेहुआं रंग, तेज चाल ये सब उनके व्यक्तित्व की विशेषताएं थीं| अपने समय मे लॉ पास किया था तो विभाग के…

मदद

यह कहानी एक युवा की है जिसने सालों पहले अपने उपर किए गये एक अहसान का कर्ज़ वर्तमान में चुकाया|   शेखर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाला महत्वाकांक्षी युवक था| पिछले कुछ सालों से वह बाहर विदेश में था| अभी-अभी उसका स्थानांतरण भारत में हुआ| अभी एक साल भी नहीं हुआ था उसे…

आशाएं

एक लड़का था। उसका नाम था रमन। 12 साल का था। जिस उम्र में उससे और बच्चों की तरह खेलना कूदना चाहिए था,उस उम्र में वो ऐसा कुछ नई कर पा रहा था। पर ये सब उसके लिए मुमकिन नहीं था। छोटे से शहर में रहता था। छोटा सा घर था। एक चॉल में रहता…

तीन राजकुमार

भरतपुर में आज शोक का माहौल था। भरतपुर के राजा विराट का आज देहांत हो गया। राजा विराट की उम्र काफी हो चुकी थी, वह काफी वृद्ध हो चुके थे। राजा विराट ने अपने जीवनकाल में बहुत से राजाओ को धूल चटाई थी और साथ ही साथ अपने राज्य का पालन भी अच्छे से किया…

घमण्ड

  आज भी यश एक साधारण सा बच्चा, उम्र तकरीबन बारह वर्ष की होगी, रिक्शे से विद्यालय जा रहा है। मन ही मन बहुत खुश है, यह ख़ुशी उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही है। यश अपने बैग को बार-बार खोलता है, उसके अंदर कुछ झाँकता है और फिर हाथ से किसी वस्तु को निहारता…

बचपन का बोझ और खुद्दारी की चमक

बचपन- हसीं ठिठोली का समय, अब अश्को में धूल रहा है, जो देश का भविष्य है, वो सड़कों पे पल रहा है, सासेंतो चल रही है, मगर कही दब गए है सपने, शायद उन्ही जूठे बर्तन ईंट-पत्थरों के नीचे|   खाने की चाह में रोता –बिलखता एक नन्हा सा बच्चा आया मेरे पास कहा बाबूजी…

ज़िन्दगी – एक अधूरा सपना

एक कड़ी है बीते हुए बचपन और आने वाले बचपन के बीच। कई बार हालात ऐसे होते हैं जब चाहते हुए भी इंसान अपनी ख्वाइशों का गला घोंटने के लिए मजबूर हो जाता है, और फिर जब उसके जीवन में एक नयी ज़िन्दगी अंकुरित होती है तो वही इंसान प्रयास करता है अपने मासूम के एक बेहद…

असली जीत

मनुष्य कई बार हारकर भी जीत जाता है और यही बयां कर रही है यह कहानी।     राज और राजन एक ही कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्र थे, वह दोनों ग्यारहवी कक्षा के छात्र थे। दोनों में आपस में दोस्त थे। राजू साधारण सा छात्र था, वह पढाई में भी सामान्य था और…

दो दोस्त

दो बच्चे कैसे बढ़िया दोस्त बन, यह दास्तां बयां करती है यह कहानी|     मोनू आज भी सुबह सुबह अपने घर से विद्यालय जाने के निकला और अपनी माँ के साथ विद्यालय को जाने लगा। मोनू रोज रोड पर जितनी भी दुकाने होती उन सबको देखते और निहारते हुए विद्यालय को जाता था। ऐसे…