Category Archives: बच्चों की कहानियां

एक सबक

कुछ महीनों से गाँव में कंचों का ट्रेंड चल रहा था। गाँव में हर दूसरा बच्चा कंचों के साथ खेलते हुए दिखाई देता था। रंग-बिरंगे, गोल-गोल कंचें जो बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ये कंचों का खेल बच्चों को बहुत लुभा रहा था। गाँव की मिट्टी में सने हुए हाथ-पाँव की परवाह किए…

अमरुद का पेड़

कई बार बचपन की हरकतों को याद करते ही चेहरे पर एक हँसी आ जाती है। जब भी बचपन की यादें ताज़ा होती है तब चेहरे पर एक नया भाव होता है, इस भाव में लीन होते ही कई बार ख़ुशी के आँसू निकल जाते है तो कई बार एक विस्मयकारी हँसी आ जाती है।…

ख्वाहिश

हर्ष आज अपने दोस्तों के साथ बाजार घूमने चला गया। उसे घूमने-फिरने का बहुत शौक था, उसके लिए तो वह कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेता था। उसकी उम्र तकरीबन ग्यारह वर्ष की होगी। बचपन से उसे अलग-अलग जगहों पर घूमने-फिरने की हमेशा उत्सुकता रहा करती थी। घर में उसे बाहर अकेले घूमने-फिरने की…

स्नेह

मनोज अपने पाँव पटकते हुए घर से निकल गया, मन ही मन पता नही क्या-क्या बड़बड़ा रहा था, चेहरे पर गुस्सा झलक रहा था, आँखे लाल हो गई थी, आँखों में पानी था और सीधे तालाब के पास खाली जगह पर पहुँच गया। आज दूसरो के पेड़ से आम तोड़ते हुए उसके बड़े भैया ने…

नवाब और सियार

एक ऐसे नवाब की कहानी जो नवाब नहीं होते तो सबके लिए बढ़िया था। ये हाथियों को जूते पहनाते हैं, कबूतरो  पर आक्रमण करवाते हैं और सियारों को…वो खुद पढ़िए! “कहानी बिहार के एक छोटी सी रियासत की है। माना जाता है कि ये अंग्रेजों के जमाने से भी पुरानी बात है। उन दिनों वहां…

मदद

यह कहानी एक युवा की है जिसने सालों पहले अपने उपर किए गये एक अहसान का कर्ज़ वर्तमान में चुकाया|   शेखर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाला महत्वाकांक्षी युवक था| पिछले कुछ सालों से वह बाहर विदेश में था| अभी-अभी उसका स्थानांतरण भारत में हुआ| अभी एक साल भी नहीं हुआ था उसे…

तीन राजकुमार

भरतपुर में आज शोक का माहौल था। भरतपुर के राजा विराट का आज देहांत हो गया। राजा विराट की उम्र काफी हो चुकी थी, वह काफी वृद्ध हो चुके थे। राजा विराट ने अपने जीवनकाल में बहुत से राजाओ को धूल चटाई थी और साथ ही साथ अपने राज्य का पालन भी अच्छे से किया…

घमण्ड

  आज भी यश एक साधारण सा बच्चा, उम्र तकरीबन बारह वर्ष की होगी, रिक्शे से विद्यालय जा रहा है। मन ही मन बहुत खुश है, यह ख़ुशी उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही है। यश अपने बैग को बार-बार खोलता है, उसके अंदर कुछ झाँकता है और फिर हाथ से किसी वस्तु को निहारता…

बचपन की यादें

बचपन की यादों को एक बार फिर जीवंत करने, एक बार फिर खुद को भूल झुम आते हैं बचपन के उस अल्हड़ सावन में, झूमती मस्ती में और बेपरवाह भागते हैं उन रंगीन तितलियों के पीछे|   बचपन- वो दौड़ जब माँ की कही हर बार पर बच्चा आंख मूंद कर विश्वास कर लेता है…

बचपन का बोझ और खुद्दारी की चमक

बचपन- हसीं ठिठोली का समय, अब अश्को में धूल रहा है, जो देश का भविष्य है, वो सड़कों पे पल रहा है, सासेंतो चल रही है, मगर कही दब गए है सपने, शायद उन्ही जूठे बर्तन ईंट-पत्थरों के नीचे|   खाने की चाह में रोता –बिलखता एक नन्हा सा बच्चा आया मेरे पास कहा बाबूजी…